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Kanpur News: टाइपिंग टेस्ट में फेल हुए तीन क्लर्क, चपरासी पद पर हो गया डिमोशन, मृतक आश्रित कोटे पर हुई थी नियुक्ति

Uttar Pradesh News: कानपुर के जिला मुख्यालय परिसर में एक प्रशासनिक फैसला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है. हाल ही में कानपुर में जिलाधिकारी ऑफिस में तैनात तीन जूनियर क्लर्कों का चपरासी के पद पर डिमोशन कर दिया गया है.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 8, 2026 14:22:58 IST

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Uttar Pradesh News: कानपुर के जिला मुख्यालय परिसर में एक प्रशासनिक फैसला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है. हाल ही में कानपुर में जिलाधिकारी ऑफिस में तैनात तीन जूनियर क्लर्कों का चपरासी के पद पर डिमोशन कर दिया गया है. 

इस डिमोशन का मुख्य कारण उन कर्मचारियों का टाइपिंग क्षमता परीक्षा में अनुत्तीर्ण होना था. यह कार्रवाई कानूनी दिशानिर्देशों और नियमों के तहत की गई है, जिनमें क्लर्क पद के लिए निर्धारित टाइपिंग स्पीड और अन्य पात्रता शर्तें अनिवार्य रूप से पूरी करना आवश्यक है.

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार इन तीनों कर्मचारियों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे पर हुई थी. इन कर्मचारियों में डीएम कैंप कार्यालय में तैनात प्रेमनाथ यादव, कलेक्ट्रेट में कार्यरत अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव शामिल हैं. बताया जा रहा है इन कर्मचारियों को दो बार टाइपिंग सीखने और निर्धारित क्षमता 25 शब्द प्रति मिनट को प्राप्त करने का निर्देश दिया गया था. इससे पहले 2024 में जब इनका ताइपिंग टेस्ट हुआ तो भी ये तीनों कर्मचारी उत्तीर्ण नहीं हो पाए थे, जिसकी वजह से इनकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी गयी थी. इसके बाद इन्हें जब दूसरा मौका दिया गया तो भी ये निर्धारित टाइपिंग क्षमता नहीं प्राप्त कर सके हैं, जिसकी वजह से यह कठोर कार्रवाई की गयी. बता दें कि कानपुर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने यह डिमोशन किया है. 

अपनी तरह की पहली घटना 

यह कार्रवाई कानपुर में अपनी तरह की पहली घटना मानी जा रही है. जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी नौकरियों में बुनियादी कौशल जैसे टाइपिंग भी जरूरी हैं. केवल भर्ती हो जाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदर्शन और न्यूनतम योग्यता भी बनाए रखनी अनिवार्य है. जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी कामकाज में दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कदम उठाए जाएंगे. यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. 

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Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 8, 2026 14:22:58 IST

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Uttar Pradesh News: कानपुर के जिला मुख्यालय परिसर में एक प्रशासनिक फैसला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है. हाल ही में कानपुर में जिलाधिकारी ऑफिस में तैनात तीन जूनियर क्लर्कों का चपरासी के पद पर डिमोशन कर दिया गया है. 

इस डिमोशन का मुख्य कारण उन कर्मचारियों का टाइपिंग क्षमता परीक्षा में अनुत्तीर्ण होना था. यह कार्रवाई कानूनी दिशानिर्देशों और नियमों के तहत की गई है, जिनमें क्लर्क पद के लिए निर्धारित टाइपिंग स्पीड और अन्य पात्रता शर्तें अनिवार्य रूप से पूरी करना आवश्यक है.

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार इन तीनों कर्मचारियों की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे पर हुई थी. इन कर्मचारियों में डीएम कैंप कार्यालय में तैनात प्रेमनाथ यादव, कलेक्ट्रेट में कार्यरत अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव शामिल हैं. बताया जा रहा है इन कर्मचारियों को दो बार टाइपिंग सीखने और निर्धारित क्षमता 25 शब्द प्रति मिनट को प्राप्त करने का निर्देश दिया गया था. इससे पहले 2024 में जब इनका ताइपिंग टेस्ट हुआ तो भी ये तीनों कर्मचारी उत्तीर्ण नहीं हो पाए थे, जिसकी वजह से इनकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी गयी थी. इसके बाद इन्हें जब दूसरा मौका दिया गया तो भी ये निर्धारित टाइपिंग क्षमता नहीं प्राप्त कर सके हैं, जिसकी वजह से यह कठोर कार्रवाई की गयी. बता दें कि कानपुर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने यह डिमोशन किया है. 

अपनी तरह की पहली घटना 

यह कार्रवाई कानपुर में अपनी तरह की पहली घटना मानी जा रही है. जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी नौकरियों में बुनियादी कौशल जैसे टाइपिंग भी जरूरी हैं. केवल भर्ती हो जाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदर्शन और न्यूनतम योग्यता भी बनाए रखनी अनिवार्य है. जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी कामकाज में दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कदम उठाए जाएंगे. यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. 

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