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नाम बड़े और दर्शन छोटे निकला ये फर्जी बाबा! बागेश्वर धाम की तर्ज पर चला रहा था दिव्य दरबार, रियलिटी चेक में हुआ बेनकाब

Mauganj Divya Darbar: बागेश्वर धाम की तर्ज़ पर एक 'दिव्य दरबार' का आयोजन किया जा रहा है. लक्ष्मी नारायण बाबा दावा करते हैं कि वे आस्था से इलाज (फेथ हीलिंग) के ज़रिए चौथे चरण के कैंसर को भी ठीक कर सकते हैं. इस दावे की वजह से, MP के अलावा कई राज्यों से लोग यहां आते है. लेकिन जब इस दरबार का रियलिटी चेक हुआ तब इसकी पूरी पोल-पट्टी खुल गई.

Madhya Pradesh Fake Baba Case: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के बेलौही गांव में बागेश्वर धाम की तर्ज़ पर एक ‘दिव्य दरबार’ का आयोजन किया जा रहा है. लक्ष्मी नारायण बाबा दावा करते हैं कि वे आस्था से इलाज (फेथ हीलिंग) के ज़रिए चौथे चरण के कैंसर को भी ठीक कर सकते हैं. इस दावे की वजह से, MP के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी लोग यहां आ रहे हैं.
मंगलवार और शनिवार को सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा होती है. दावों की सच्चाई जानने के लिए, सूत्रों ने रीवा से लगभग 100 km दूर बेलौही पहुंची और वहां चल रही प्रक्रिया को देखा. टीम ने तीन रियलिटी चेक किए, जिनमें बाबा फेल हो गए.

कैसा था बाबा का दरबार?

दैनिक भास्कर के अनुसार, जांच ​​में पता चला कि ‘स्लिप सिस्टम’ पहले से तय और मैनेज किया हुआ है. इसमें, चुने हुए लोगों को नाम लेकर बुलाया जाता है. लोगों का भरोसा जीतने के लिए, बाबा के अपने परिवार के सदस्य ही उनकी तारीफ करते दिखे. लक्ष्मी नारायण बाबा दिव्य दरबार लगाकर आस्था के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं. खुले आसमान के नीचे दिव्य दरबार: दिव्य दरबार पहुंचने पर, हर जगह पोस्टर दिखाई देते हैं. यह कार्यक्रम गांव के पास खेतों के बीच हो रहा था, जहां गाड़ियां खड़ी थीं और माइक्रोफ़ोन पर बाबा की आवाज गूंज रही थी. अंदर जाने से पहले, लोग अपने जूते-चप्पल उतार रहे थे. अंदर, लगभग 100 लोग चटाइयों पर हाथ जोड़कर बैठे थे. इनमें आस-पास के ज़िलों के भक्तों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ से आए लोग भी शामिल थे.

स्लिप निकालने और लोगों से मिलने का सिस्टम

स्लिप निकालने और लोगों से मिलने की प्रक्रिया तय समय के अनुसार चलती है. लक्ष्मी नारायण बाबा सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक दरबार लगाते हैं, जहां भक्त पहले से ही पहुंच जाते हैं. बाबा मंच पर एक छोटे से लकड़ी के मंदिर में रखी हनुमान जी की मूर्ति को ‘विज्ञान धर्म सरकार’ कहकर पुकारते हैं, और कुछ देर तक कथित शक्तियों से बातचीत करते हैं.
इसके बाद, दो पेड़ों के बीच बांस पर एक नारियल बांधकर एक माहौल बनाया जाता है. बाबा लोगों से नारे लगवाते हैं. फिर, आंखें बंद करके, बिना किसी का नाम लिए, वे इशारों में बताते हैं कि किस गांव का व्यक्ति वहां मौजूद है और उसकी ‘अर्ज़ी’ लग गई है.

क्या था बाबा के समाधान बताने का एक ही तरीका?

बाबा के समाधान बताने के तरीके में एक तय पैटर्न देखने को मिला. जांच में पता चला कि वे ज़्यादातर मामलों को भूत-प्रेत के साये और काले जादू से जोड़ते हैं, लेकिन इसके लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति का नाम लेने से बचते हैं. भक्तों की हालत देखकर, वह बार-बार वही बातें दोहराते हैं, जैसे-
  • बुजुर्ग: शरीर में दर्द, अकड़न, पेट दर्द और सिरदर्द की शिकायतें बताई जाती हैं.
  • महिला: पीठ, पैरों और पेट दर्द के साथ-साथ ‘जादू-टोना’ और ‘भूत-प्रेत के साये’ होने का दावा किया जाता है.
  • बच्चा: पढ़ाई में मन न लगना, अजीब व्यवहार करना और ‘किसी के कुछ करने’ की बातें करना बताया जाता है.
  • दुबला-पतला व्यक्ति: कमज़ोरी, काम में मन न लगना और ‘भूत-प्रेत के साये’ होने की बात कही जाती है.
बताया जा रहा है कि भास्कर की टीम को देखते ही बाबा का रवैया बदल गया टीम ने दरबार की सच्चाई परखने का प्रस्ताव रखा. शुरू में हिचकिचाने के बाद, वह मान गए. टीम ने दो शर्तें रखीं-
  • पहली – दरबार में मौजूद लोगों में से ही किसी एक व्यक्ति को चुना जाएगा.
  • दूसरी – एक व्यक्ति ऐसा होगा जो बाहर का हो और जिसका पहले से कोई रिकॉर्ड न हो.

रियलिटी चेक में दावों की खुली पोल

1. समस्या पैसे की थी, बीमारी का दावा किया गया
टीम ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को मंच पर बुलाया. बाबा ने आंखों में जलन, सिरदर्द और ‘किसी साये’ का ज़िक्र किया, लेकिन बुजुर्ग ने साफ किया कि वह तो पैसों से जुड़ी समस्या लेकर आए थे. बाबा ने उन पर अपनी मनगढ़ंत कहानी थोपने का आरोप लगाया. टीम के दखल के बाद, बुजुर्ग ने पूरी कहानी बताई. जब भास्कर ने बाबा के लिखे हुए नोट को देखा, तो उसमें पैसों का कोई ज़िक्र नहीं था. आखिर में, बाबा ने एक नारियल बांधने की सलाह देकर मामले को संभालने की कोशिश की. इस तरह, वह पहले रियलिटी चेक में फेल हो गए.
2. बाहरी व्यक्ति पर चुप्पी
दूसरे टेस्ट में, एक ऐसे व्यक्ति को लाया गया जिसे न तो बाबा जानते थे और न ही टीम. शुरू में बाबा हिचकिचाए, लेकिन बाद में उसे बुलाने की इजाज़त दे दी. उसका नाम ब्रजभान साहू था. जैसे ही वह मंच पर पहुंचा, बाबा ने ‘सामूहिक अर्जी’ का हवाला देकर उससे बचने की कोशिश की. उन्होंने बाकी भक्तों को मंच पर बुला लिया. टीम के ज़ोर देने पर भी, बाबा ने बस इतना कहा कि उस व्यक्ति पर कोई भूत-प्रेत का साया नहीं है और कहा कि वह अगली बार बताएंगे. काफी देर इंतज़ार करने के बाद भी, वह उस व्यक्ति के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे पाए.
3.आध्यात्मिक ज्ञान की परीक्षा में फेल
बाबा दावा करते हैं कि उन्हें भागवत, रामायण और गीता का ज्ञान है, लेकिन वे सवालों के साफ-साफ जवाब नहीं दे पाए. गोपी गीत, भागवत में श्लोकों की संख्या और नवधा भक्ति जैसे सवालों पर वे टालमटोल करते दिखे.
पहला सवाल: जो लोग भागवत का पाठ करते हैं, उन्हें गोपी गीत मुंहज़बानी याद होता है.
जवाब: मुझे यह याद है, लेकिन अभी मैं इसे सुना नहीं सकता.
दूसरा सवाल: भागवत में कितने श्लोक, स्कंध और अध्याय हैं?
जवाब: शायद 18,000 श्लोक हैं, बाकी अभी नहीं बता सकता.
तीसरा सवाल: राम कथा के संदर्भ में नवधा भक्ति की चौपाई सुनाइए.
जवाब: इसमें संतों की संगति और ईश्वर की चर्चा का ज़िक्र किया गया है.
चौथा सवाल: राम रक्षा स्तोत्र का कोई एक श्लोक सुनाइए.
जवाब: मैं इसे केवल प्रवचन के दौरान ही सुना पाऊंगा.

नामों का पता कैसे चलता है? 500 रुपये का ‘राज़’

बाबा दावा करते हैं कि उनके दरबार में कोई शुल्क नहीं लगता, लेकिन जांच में पता चला कि ‘रजिस्ट्रेशन’ के नाम पर प्रति व्यक्ति 500 ​​रुपये लिए जाते हैं. इस प्रक्रिया के दौरान नाम दर्ज किए जाते हैं. बाद में, इन्हीं नामों को मंच से पुकारा जाता है, जिससे ‘दिव्य ज्ञान’ होने का भ्रम पैदा होता है. दरबार में पहुंचे प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी ने इस बात की पुष्टि की और बताया कि उनसे 500 रुपये लिए गए थे और उन्हें अगली बार आने को कहा गया था.
जो लोग अपना नाम नहीं देते, उन्हें मंच पर नहीं बुलाया जाता. जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया और अपना नाम नहीं दिया, उन्हें दरबार में नहीं बुलाया गया. पहली बार आए लक्ष्मीकांत मिश्रा ने कहा कि मैंने जान-बूझकर अपना नाम नहीं दिया, इसलिए मुझे मौका नहीं मिला. उम्मीद तो थी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी. परिवार के सदस्य खुद ही ‘चमत्कार’ का प्रचार करते हैं. बाबा की तारीफ करने वालों में मुद्रिका प्रसाद मिश्रा भी शामिल थे, जो खुद को ‘भूत-प्रेत बाधा’ से ठीक होने का एक उदाहरण बता रहे थे. जांच में पता चला कि वे बाबा के ही परिवार के सदस्य हैं. वे कहानियां सुनाकर लोगों को प्रभावित करते हैं.

क्या है डॉक्टरों का कहना?

डॉक्टरों का कहना है कि ‘भूत-प्रेत’ के दावे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े हैं. वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यत्नेश त्रिपाठी के अनुसार, ‘भूत-प्रेत’ जैसी बातें अक्सर मानसिक समस्याओं से जुड़ी होती हैं. इनका प्रचार करने से मरीज डिप्रेशन (अवसाद) में जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि काउंसलिंग और दवाओं से इलाज संभव है, जबकि पवित्र भस्म से कैंसर ठीक होने जैसे दावे गुमराह करने वाले हैं.
Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

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