UP Politics: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने वाला है, लेकिन सभी पार्टियों ने इसको लेकर तैयारी अभी से शुरू कर दी है. एक तरफ सपा, बसपा और कांग्रेस ने कांशीराम की जयंती के मौके पर अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन कर दलित और पिछड़ा वोटरों को साधने का काम किया. वहीं, दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाकर बड़ा दांव खेला है. जिसको लेकर बताया जा रहा है कि बीजेपी ने इस एक फैसले ने अपनी सहयोगी पार्टियों और विपक्षियों को गहरा झटका लग सकता है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि साध्वी निरंजन ज्योति को इतने बड़े पद पर बैठाकर ओबीसी वर्ग को एक बड़ा संदेश दिया है. बीजेपी की इस रणनीति को पिछड़ा-केंद्रित सियासी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी को होगा फायदा? इससे पहले बीजेपी ने केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कुर्मी वोटरों को बड़ा संकेत दिया था. अब साध्वी निरंजन ज्योति की नियुक्ति के बाद निषाद समाज को बड़ा संदेश देने का काम किया है. जिससे बीजेपी की सहयोगी पार्टियों और विपक्षी पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लग सकता है. बिहार में बीजेपी और एनडीए को मिली प्रचंड जीत और एक के बाद हो रही सियासी नियुक्तियों ने बीजेपी ने दिखा दिया कि वो अपनी सहयोगी पार्टियों का दबाव झेलने वाली नहीं है. विपक्ष और सहयोगी पार्टी को दिया बड़ा मैसेज बीजेपी के इन फैसलों के पीछे की वजह बताई जा रही है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सहयोगी पार्टियों ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी थी. पिछड़े समाज से आने वाले कई नेता चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन छोड़कर सपा के साथ मिल गए थे. हालांकि चुनाव में मिली हार के बाद कई नेता वापस भी आ गए थे, लेकिन इस बार कोई भी जोखिम उठाने को तैयार नहीं है. इसलिए एक-एक कदम फूंक-फूंककर उठा रही है.