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गंगा किनारे भूकंप से कानपुर-प्रयागराज में तबाही का खतरा: IIT की रिसर्च ने बढ़ाई चिंता

IIT Kanpur research: IIT कानपुर की एक ताजा रिसर्च में गंगा किनारे बसे कानपुर और प्रयागराज के लिए भूकंपीय खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. अध्ययन के मुताबिक, इस क्षेत्र में संभावित भूकंप से भारी तबाही हो सकती है

IIT Kanpur research: कानपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान IIT-कानपुर द्वारा किए गए 17 वर्षों के अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि क्षेत्र में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो कानपुर और प्रयागराज के कुछ हिस्सों को गंभीर क्षती का सामना करना पड़ सकता है. आईआईटी-कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. निहार रंजन पात्रा के नेतृत्व में किए गए रिसर्च में गंगा नदी के किनारे की जलोढ़ मिट्टी की उच्च द्रवीकरण क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है, एक ऐसा कारक जो जमीन के कंपन को तेजी से बढ़ा सकता है और इमारतों को अस्थिर कर सकता है. यानी इन दोनों शहरों में जमीन के नीचे मिट्टी में बालू के कण बेहद महीन कण हैं. भूकंप के तीव्र झटकों से मिट्टी की ताकत खत्म होती जाती है और पानी मिट्टी के साथ बाहर आकर पक्के ढांचों को गिरा देता है.

43 स्थानों से लिए गए सैंपल

IIT-कानपुर की शोध टीम ने गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार से लगभग दो दशकों में एकत्र किए गए मिट्टी के सैंपल का विश्लेषण किया. कानपुर और प्रयागराज में चयनित क्षेत्रों में दो स्थानों पर 30 से 40 मीटर और 80 मीटर की गहराई तक बोरहोल खोदकर 43 स्थानों से नमूने लिए गए, जो कि अन्य जगहों पर आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले 10-30 मीटर की तुलना में ज्यादा गहरा है. कानपुर और प्रयागराज के कई हिस्सों में, मिट्टी की ऊपरी 8-10 मीटर परत ढीली, रेतीली और जलसंतृप्त है. ऐसी स्थितियों में तेज भूकंप के दौरान द्रवीकरण के लिए अत्यधिक ढलान होता हैं.

रेट्रोफिटिंग की सिफारिश

अध्ययन में तेजी से बढ़ता शहरीकरण, मिट्टी की विस्तृत जांच के बिना ऊंची इमारतों का निर्माण और भवन निर्माण संहिता के कमजोर प्रवर्तन को प्रमुख चिंताओं के रूप में उजागर किया गया है. इसमें बताया गया है कि भूकंपरोधी मानकों के अनुरूप डिजाइन न की गई पुरानी संरचनाओं और इमारतों को एक बड़े भूकंप में सबसे अधिक नुकसान का सामना करना पड़ता है. पात्रा ने निर्माण से पहले अनिवार्य रूप से मिट्टी परीक्षण, भूकंपरोधी डिजाइन, नियमों का कड़ाई से माननाऔर अस्पतालों, स्कूलों और सरकारी कार्यालयों जैसी कमजोर सार्वजनिक इमारतों के रेट्रोफिटिंग की सिफारिश की गई है.

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