Chaupal with media and DM: रायबरेली की नई सारथी जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने जिले की प्रशासनिक मशीनरी को पटरी पर लाने के लिए 'सर्जिकल स्ट्राइक' वाले तेवर अपना लिए हैं. गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों के साथ पहली औपचारिक बैठक में डीएम ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि फाइलों में विकास की इबारत लिखने वाले और जनता को दफ्तरों के चक्कर कटवाने वाले अधिकारियों के दिन अब लद चुके हैं.
रायबरेली में चौपाल में चर्चा.
Chaupal with media and DM: रायबरेली की नई सारथी जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने जिले की प्रशासनिक मशीनरी को पटरी पर लाने के लिए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वाले तेवर अपना लिए हैं. गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों के साथ पहली औपचारिक बैठक में डीएम ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि फाइलों में विकास की इबारत लिखने वाले और जनता को दफ्तरों के चक्कर कटवाने वाले अधिकारियों के दिन अब लद चुके हैं.
बैठक में जब पत्रकारों ने जिले की समस्याओं का पुलिंदा खोला, तो एक के बाद एक कई कड़वे सच सामने आए. जिलाधिकारी ने बड़े ही धैर्य से मीडियाकर्मियों की बात सुनी और एक सजग अभिभावक की तरह हर समस्या को डायरी में नोट किया. निजी स्कूलों द्वारा फीस के नाम पर की जा रही लूट, एनसीईआरटी की किताबें न लगाना, सड़कों की खस्ताहाली और जल जीवन मिशन में हो रही देरी जैसे गंभीर मुद्दों पर डीएम का ध्यान आकर्षित किया गया. वहीं, शहर के जाम, अतिक्रमण, अवैध प्लाटिंग और बिना मान्यता चल रहे प्राइवेट अस्पतालों के ‘मकड़जाल’ पर भी तीखे सवाल उठे.
डीएम सरनीत कौर ब्रोका तब सख्त लहजे में दिखीं जब उन्हें पता चला कि साहबों के सीयूजी (CUG) नंबर अक्सर या तो उठते नहीं, या फिर कोई चपरासी या गनर उठाता है. डीएम ने दोटूक फरमान सुनाया कि सीयूजी नंबर मतलब अधिकारी की सीधी जवाबदेही. फोन खुद उठाना होगा, वरना कार्रवाई की फाइल तैयार मिलेगी. उन्होंने भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात दोहराते हुए कहा कि किसी भी विभाग में रिश्वतखोरी की गंध आई तो खैर नहीं.
डीएम ने गौशालाओं में अव्यवस्था और तहसीलों में लंबित पड़ी फाइलों के ढेर पर गहरी नाराजगी जताई. उन्होंने साफ कहा कि एक-एक अधिकारी के पास कई-कई विभागों का प्रभार होने से काम की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए. अमृत योजना और रिंग रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति की वह खुद समीक्षा करेंगी.
बैठक के दौरान एडीएम प्रशासन सिद्धार्थ भी मौजूद रहे और लगातार डीएम के निर्देशों को नोट करते दिखे. डीएम के इस ‘विशाल’ और ‘कड़क’ तेवर ने जिले के सुस्त पड़े प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी है. बैठक के बाद से ही विकास भवन से लेकर तहसीलों तक बस एक ही चर्चा है कि मैडम का मिजाज सख्त है, अब काम करना ही पड़ेगा! शहर के जाम से लेकर गांवों की जल जीवन मिशन योजना तक, डीएम ने हर उस बिंदु पर फोकस किया है जहां भ्रष्टाचार की दीमक सिस्टम को खोखला कर रही थी. अब देखना यह है कि मैडम की इस ‘सर्जिल स्ट्राइक’ का असर जिले की सड़कों और सरकारी दफ्तरों में कब तक नजर आता है.
डीएम सरनीत कौर ब्रोका ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और आज जो फीडबैक मिला है, वह जमीनी हकीकत है. भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा. मेरा उद्देश्य केवल आदेश देना नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव लाना है.
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