<

Jewar airport में मिले रुपए का सही यूज नहीं कर पा रहे किसान, किसी ने खोला बिजनेस तो कोई जुए में बर्बाद?

Jewar airport: उत्तर प्रदेश के जेवर में भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने के लिए स्थानीय किसानों को भारी कीमत चुकानी पड़ी. उन्हें अपनी 12,000 एकड़ उपजाऊ ज़मीन छोड़नी पड़ी. किसी ने बड़ा काम किया तो किसी ने जुआ में फूंक दिए रुपए.

Jewar airport: उत्तर प्रदेश के जेवर में भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने के लिए स्थानीय किसानों को भारी कीमत चुकानी पड़ी. उन्हें अपनी 12,000 एकड़ उपजाऊ ज़मीन छोड़नी पड़ी. बदले में उन्हें करोड़ों रुपये का मुआवज़ा मिला. कई परिवारों के लिए यह ऐसी दौलत थी जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. खेतों की जगह घर बन गए. ट्रैक्टर की जगह कारें आ गईं.

बेसिक फोन की जगह आईफोन आ गए. जेवर के गांव वालों की जिंदगी बदल गई और वे स्थानीय स्तर पर पहले कभी न देखी गई खुशहाली के स्तर पर पहुंच गए. लेकिन एयरपोर्ट के उद्घाटन से ठीक पहले, वह चमक थोड़ी कम होती दिख रही है.

परेशानियों से घिरे ग्रामीण

एक किसान का बेटा मोहम्मद कैफ अपना स्मार्टफोन दिखाता है. उसने मुआवज़े का पैसा मिलने पर करीब 90,000 रुपये में खरीदा था. आज उसकी स्क्रीन टूटी हुई है. वह जुगाड़ वाले चार्जर से फोन चलाता है, क्योंकि वह मरम्मत का खर्च नहीं उठा सकता. किसान इस्माइल खान कहते हैं कि अब हम थार में बैठकर खेतों में जाते हैं लेकिन हमारे पास पेट्रोल के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं. एक और व्यक्ति अपनी खरीदी हुई चीज़ों में से बची हुई चीज़ों की ओर इशारा करता है. एक iPhone 11 Pro Max, जो अब बेच दिया गया है और उसकी जगह एक सस्ता एंड्रॉयड फोन ले लिया गया है. 

दो अलग-अलग भविष्य

इंडिया टुडे की साइट पर लगी एक खबर के अनुसार, एक गांव का घर किसी लग्जरी होटल की लॉबी जैसा दिखता है. मार्बल के फर्श, स्टाइलिश लिविंग रूम, एक आधुनिक चिमनी वाला किचन. इसके कंस्ट्रक्शन में ही करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च किया गया. घर के मालिक ठाकुर धर्म पाल सिंह कहते हैं कि मैं दूध बेचता हूं और एक बिज़नेस चलाता हूं. मेरे पास दो कारें हैं. मैं खुश हूं और यह भगवान की कृपा है. उन्होंने अपने पैसे का समझदारी से निवेश किया और उसे कई गुना बढ़ा दिया. उनके लिए मुआवज़ा पूंजी बन गया. 

लेकिन, उसी कॉलोनी के दूसरे हिस्से में तस्वीर अलग है. पड़ोस के पार्क में मौजूद 50 से अधिक आदमी जुआ खेल रहे थे. उन्होंने कहा कि वे अपने परिवारों का पेट पालने के लिए काम करने के बजाय टाइम पास कर रहे हैं. उन्हें भी मुआवज़े में करोड़ों रुपये मिले थे लेकिन यहां कई लोगों ने कहा कि उनकी बचत खत्म हो गई है. इस वजह से उन्हें अपने रहन-सहन के खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है. ऐसा ही एक एमए पास नौजवान से कुछ काम करने के बारे में जब सवाल पूछा गया तो उसका जवाब था: मैं ताश खेलता हूं. 

तीन बच्चों के पिता ने छोड़ी नौकरी

बीटेक किए हुए एक पिता ने भी मुआवजा मिलने के बाद नौकरी छोड़ दी. तीन बच्चों के पिता की जिम्मेदारी होने के बाद भी वह खुद को बिना काम के पाते हैं. बातचीत में बेरोजगारी, शराबखोरी, निकम्मापन और जुए जैसे मुद्दे बार-बार सामने आए. 2018 में जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के पहले चरण में किसानों को प्रति बीघा लगभग 20 लाख रुपये की पेशकश की गई थी. चौथे चरण अभी चल रहा है, तक यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर लगभग 40 लाख रुपये प्रति बीघा हो गया था. कई किसान जिन्होंने अधिग्रहण के शुरुआती चरणों में अपनी जमीन बेच दी थी. वे अब अतिरिक्त मुआवज़े की मांग कर रहे हैं. उन्होंने यह तर्क दिया कि शुरुआती भुगतान उनकी आजीविका चलाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.

जमीन से जुड़ी थी जीविका

पीढ़ियों से जिन किसानों की एकमात्र स्थिर संपत्ति जमीन थी. यह भोजन, आय और सुरक्षा देती थी. मुआवज़े ने उस संपत्ति की जगह एकमुश्त रकम दे दी. लेकिन यह पैसा बिना किसी वित्तीय योजना सहायता, मार्गदर्शन या लंबे समय की सुरक्षा के आया, जिससे उन्हें अब कुछ सूझ नहीं रहा कि इसका सही इस्तेमाल कैसे किया जाए. स्थानीय अधिकारियों ने माना कि उनकी भूमिका सीमित थी. जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार किसानों को उनकी ज़मीन के लिए उचित मुआवज़ा दे सकती है लेकिन वे उस पैसे को कैसे खर्च करते हैं, यह उन पर निर्भर है.

लंगूर के हाथ अंगूर

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय विशेषज्ञ उमेश सहगल ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि लोग उन लग्ज़री चीज़ों से अंधे हो जाएं जिनके बारे में वे 30 या 40 साल पहले सोच भी नहीं सकते थे. हम बस सलाह दे सकते हैं, लोगों से कह सकते हैं कि वे अपने पैसे का समझदारी से इस्तेमाल करें. ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर और सब-डिविज़नल ऑफिसर गांवों में जाकर उन्हें सलाह दे सकते हैं, क्योंकि पैसा हमेशा नहीं रहता. लेकिन लंगूर के हाथ में अंगूर लग जाने से वह बौरा जाता है.

सही सबक लेना होगा

इसका नतीजा साफ तौर पर दिखाई देता है. जिन्होंने योजना बनाई, निवेश किया और अलग-अलग जगह पैसा लगाया, वे आगे बढ़ गए. जिन्होंने पहले खर्च किया और बाद में सोचा, वे अब किस्मत, नीति और समय से ठगा हुआ महसूस करते हैं. जेवर अब सिर्फ़ एक एयरपोर्ट की कहानी नहीं रही. यह अचानक मिली दौलत, पॉलिसी में सुरक्षा उपायों की कमी और मुआवज़े और सस्टेनेबिलिटी के बीच की नाज़ुक लाइन के बारे में एक चेतावनी है. आखिर में, यह कहानी एक मुश्किल सवाल खड़ा करती है. जब डेवलपमेंट के लिए जमीन ली जाती है, तो क्या सिर्फ़ चेक देना काफ़ी है या जमीन के बाद की जिंदगी के लिए लोगों को तैयार करना भी उतना ही जरूरी है?

Recent Posts

अंतिम इच्छा ऐसी कि सब रह गए दंग! शव के सामने हुआ ग्लैमरस डांस, सोशल मीडिया पर मचा तूफान

Glamorous Dance at Funeral: थाईलैंड से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने सोशल…

Last Updated: May 2, 2026 22:38:51 IST

भीड़ में छिपा ‘सुरों का सितारा’! ऐसा गाया नुसरत फतेह अली खान का गाना सुन दंग रह गए मंच के कलाकार

Viral Singing Video: वायरल वीडियो में, गायकों का एक ग्रुप मंच पर लाइव परफ़ॉर्मेंस देते…

Last Updated: May 2, 2026 22:26:21 IST

Rewa News: रफ्तार का कहर… डिवाइडर फांद घर में घुसा ट्रेलर, मची अफरा-तफरी

Rewa News: रीवा के मनगवां नेशनल हाईवे पर शनिवार की दोपहर  एक बार फिर तेज…

Last Updated: May 2, 2026 19:43:38 IST

T20 Women’s World Cup: टी20 विश्व कप के लिए टीम इंडिया का एलान, इस बड़े खिलाड़ी को नहीं मिली जगह; देखें पूरी टीम

T20 Womens World Cup:इस स्क्वॉड में कैप्टन हरमनप्रीत और वाइस-कैप्टन स्मृति मंधाना के साथ-साथ कई…

Last Updated: May 2, 2026 18:54:26 IST