Akriti Chaudhary NSA Case: नोएडा की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने छात्र आकृति चौधरी पर NSA लगाने के मामले में डीएम की सैलरी से 5 लाख रुपए काटकर मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या दलीलें दी गईं और यह पूरा विवाद क्या है.
नोएडा DM मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, HC के आदेश पर रोक; जानिए क्या है आकृति चौधरी NSA विवाद?
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें नोएडा की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम की सैलरी से 5 लाख रुपए काटकर छात्र आकृति चौधरी को मुआवजे के तौर पर देने को कहा गया था. यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई कार्रवाई से जुड़ा है.
डीएम मेधा रूपम ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. बुधवार को जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की. सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत पर फैसला सुरक्षित रख लिया और मुआवजे की कटौती वाले आदेश पर स्टे लगा दिया.
2 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 25 साल की छात्रा आकृति चौधरी पर लगे NSA को रद्द कर दिया था. दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में ग्रेजुएट आकृति को अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए एक मजदूर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन पर NSA लगा दिया गया था.
प्रशासन की इस कार्रवाई और उसके आधार पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया. आकृति को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया. यह स्पष्ट किया कि मुआवजे की यह राशि इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों (जिनमें नोएडा डीएम मेधा रूपम भी शामिल हैं) की सैलरी से वसूली जाए. डीएम की भूमिका पर सख्त टिप्पणी करते हुए उनके सर्विस रिकॉर्ड में नाराजगी दर्ज करने का भी निर्देश दिया.
सॉलिसिटर जनरल की दलील: मेधा रूपम की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाई कोर्ट ने पूरी व्यक्तिगत जिम्मेदारी सीधे जिलाधिकारी पर डाल दी और उनके खिलाफ सख्त टिप्पणियां कीं, जबकि NSA लगाने की प्रक्रिया में कई स्तरों के अधिकारी शामिल होते हैं.
यूपी सरकार का पक्ष: उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि NSA का प्रस्ताव निचले स्तर से शुरू होता है, फिर कई अधिकारियों की जांच और प्रक्रिया से गुजरते हुए डीएम तक पहुंचता है.
कोर्ट की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि जब फैसले में कई अधिकारी शामिल थे, तो सिर्फ जिलाधिकारी को अकेले जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है? कोर्ट ने कहा कि किसी एक अधिकारी को इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया से अलग करके नहीं देखा जा सकता.
यह विवाद अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के एक विरोध-प्रदर्शन से शुरू हुआ था. प्रदर्शन के सिलसिले में आकृति चौधरी को गिरफ्तार कर उन पर NSA लगा दिया गया. आकृति ने इस कार्रवाई को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी. सितंबर में हाई कोर्ट ने पाया कि हिरासत के लिए पेश किए गए सबूत और आधार कानून के मुताबिक सही नहीं थे, इसलिए NSA रद्द कर दिया गया और 5 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश जारी हुआ. अब सुप्रीम कोर्ट ने सैलरी से मुआवजा वसूलने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है और इस मामले में अंतिम आदेश आना अभी बाकी है.
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