Unnao News: उत्तर प्रदेश के उन्नाव में शुक्रवार को आयोजित गविष्ठि (गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के दौरान उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने गौसंरक्षण को लेकर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती की मांग: गौमाता को मिले राष्ट्रमाता का दर्जा.
Unnao News: उत्तर प्रदेश के उन्नाव में शुक्रवार को आयोजित गविष्ठि (गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के दौरान उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने गौसंरक्षण को लेकर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए. उनका कहना था कि यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के सम्मान से भी जुड़ा हुआ है.
हफीजाबाद, बांगरमऊ स्थित बाबा बलखण्डेश्वर (परशुराम) मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं, संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. इससे पहले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे स्थित बांगरमऊ में शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया गया. सैकड़ों वाहनों के विशाल काफिले के साथ निकली गविष्ठि यात्रा के दौरान मार्गभर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, जयघोष और भगवा ध्वजों के साथ उनका अभिनंदन किया. पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला.
मंदिर परिसर में कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पादुका पूजन से हुई. आयोजक डॉ. शशांक शेखर शुक्ला और संयोजक आचार्य पं. ऋषिकांत मिश्रा शास्त्री ने विधिवत पूजन कर शंकराचार्य जी का स्वागत किया. इसके बाद माल्यार्पण और अंगवस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया गया. मंच संचालन ऋषि वैभव प्रबल ने किया, जबकि सुनील द्विवेदी ने गविष्ठि यात्रा के उद्देश्य और गौसंरक्षण के महत्व पर अपने विचार रखे.
अपने संबोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और राष्ट्रजीवन की आधारशिला हैं. उन्होंने समाज से गौरक्षा को जनआंदोलन बनाने और गौसेवा को प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व मानने का आह्वान किया. उन्होंने गौसंरक्षण के मुद्दे पर सरकार से भी अपील करते हुए कहा कि यदि जनता का विश्वास बनाए रखना है तो गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. उनके अनुसार, ऐसा निर्णय करोड़ों लोगों की आस्था का सम्मान होगा.
कार्यक्रम की एक विशेष बात यह भी रही कि इसमें विभिन्न समुदायों के लोगों ने भाग लिया. आयोजकों के अनुसार, मुस्लिम समाज के कई प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और सामाजिक सद्भाव तथा सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया. इस दौरान गौरक्षा, सामाजिक समरसता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर कई वक्ताओं ने अपने विचार भी साझा किए.
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