Yuvraj Mehta Death News: शनिवार तड़के ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में एक अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग में सड़क किनारे नाले की बाउंड्री वॉल तोड़कर एक 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार पानी से भरे बेसमेंट में गिर गई, जिससे उसकी डूबने से मौत हो गई. इस मामले में दो बिल्डिंग फर्मों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. पुलिस ने बताया कि प्रोजेक्ट के मालिक दोनों बिल्डरों के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया गया है.
ग्रेटर नोएडा के ACP हेमंत उपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मृतक के पिता की शिकायत पर नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही से मौत) और 125 (जान जोखिम में डालने वाला काम) के तहत प्लॉट के मालिक दोनों बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
मृतक की युवराज मेहता के रूप में हुई पहचान (The deceased has been identified as Yuvraj Mehta)
मृतक की पहचान युवराज मेहता के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करते थे. पुलिस के मुताबिक, मेहता ग्रैंड विटारा चला रहे थे, तभी मोड़ लेते समय उनका कंट्रोल खो गया. पुलिस ने बताया कि गाड़ी नाले की बाउंड्री वॉल से टकराकर पानी से भरे बेसमेंट में गिर गई. पुलिस ने आधी रात के आसपास नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल और फायर ब्रिगेड की टीमों को बुलाया. कई घंटों की तलाशी के बाद टीमों ने मृतक का शव बरामद किया.
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पीड़ित के दोस्तों ने क्या आरोप लगाया? (What allegations did the victim’s friends make?)
पीड़ित के दोस्तों ने आरोप लगाया कि टीमें समय पर जवाब नहीं दे पाईं. मृतक के एक दोस्त पंकज ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बचाव दल सुबह 2.30 बजे ही पहुंचे और 3.20 बजे तक पानी में भी नहीं उतर पाए. पुलिस ने कहा कि शुरुआती जांच में कम विजिबिलिटी और तेज रफ्तार को दुर्घटना का संभावित कारण बताया गया है. उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने करीब छह से सात फीट चौड़ा एक बड़ा नाला खोदा था. खराब विजिबिलिटी और तेज रफ्तार के कारण ड्राइवर का कंट्रोल खो गया होगा.
चश्मदीदों ने क्या आरोप लगाया? (What allegations did the eyewitnesses make?)
चश्मदीदों ने मेहता के डूबने से पहले मदद के लिए की गई गुहार का दिल दहला देने वाला मंजर बताया. परिवार के सदस्यों ने भी बचाव अभियान की गति और तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जो घंटों तक चला. पुलिस ने बाद में कहा कि किसी गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति को पानी में भेजने से और भी मौतें हो सकती थीं. मोनविंदर, जो कथित तौर पर एक डिलीवरी एजेंट के तौर पर काम करते हैं और जो एक चश्मदीद गवाह हैं, उन्होंने टेक एक्सपर्ट की नाले में घुसकर मदद करने की कोशिश की. उन्होंने भी प्रशासन पर “लापरवाही” का आरोप लगाया.
मोनविंदर ने बताया कि यह हादसा आधी रात के आसपास घने कोहरे में हुआ और वह करीब 1.45 बजे मौके पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि मेहता कार में फंसे रहे. मोनविंदर ने पत्रकारों को बताया कि लगभग एक घंटे पैंतालीस मिनट तक वह मदद के लिए गुहार लगाते रहे, कह रहे थे, ‘प्लीज मुझे बचा लो, किसी भी तरह मुझे बचा लो.