Ganga Corner Beer Drinking Viral Video 2026: यह मामला केवल एक व्यक्ति की निजी पसंद का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थलों की धार्मिक शुचिता और कानूनी निष्पक्षता से जुड़ा है वीडियो में दिख रहा व्यक्ति ना केवल शराब पी रहा है, बल्कि अपनी पहचान एक प्रभावशाली संगठन के नेता के रूप में बताकर कानून को चुनौती देता प्रतीत हो रहा है, यूजर्स का तर्क है कि यदि गंगा किनारे खाना (इफ्तार) खाने से भावनाएं आहत हो सकती हैं और गिरफ्तारी हो सकती है, तो उसी स्थान पर शराब (बीयर) पीना एक कहीं अधिक गंभीर अपराध और अपमान होना चाहिए, क्या इनके लिए सब माफ है? और कहां गया कानून? जैसे हैशटैग के साथ लोग आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, लोगों का कहना है कि पवित्र नदियों के किनारे नशा करना ना केवल धार्मिक रूप से गलत है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी 'सार्वजनिक उपद्रव' की श्रेणी में आता है, अभी तक स्थानीय पुलिस या प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि रसूखदार संगठनों से जुड़े लोगों के लिए नियम अलग हो सकते हैं, यह घटना एक बार फिर इस बहस को जन्म देती है कि क्या भारत में 'भावनाओं के आहत होने' की परिभाषा व्यक्ति की धार्मिक और राजनीतिक पहचान पर निर्भर करती है.