Iran Violence: लगभग तीन हफ्तों से ईरान हिंसा की आग में जल रहा है. आए-दिन प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ सड़कों पर उतर रही है. ये प्रदर्शन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मानी जा रही है. इस चिंताजनक माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों का साथ दिया है. साथ ही ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी, तो वह बड़ा कदम उठाएगा. इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ईरान में बंद कुछ कैदियों को रिहा कराने की मांग कर रहा है.
कैदियों का किया जिक्र
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के फारसी भाषा के एक्स (ट्वीटर) अकाउंट से आज यानी 14 जनवरी को एक ट्वीट किया गया है. इसमें उन्होंने ईरान में बंद कुछ राजनीतिक कैदियों को जेल से रिहा करने की मांग की है. पोस्ट में लिखा, ‘हम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा पर चिंता जता रहे तो ये न समझा जाए कि हमने उन राजनीतिक कैदियों को भुला दिया है, जिन्हें इन विरोध प्रदर्शनों से पहले ही जेल में डाल दिया गया था.’ इसमें आठ राजनीतिक कैदियों के चित्र के साथ उनके नामों का भी जिक्र किया गया है.
خطاب به رژیم جمهوری اسلامی ایران:
در حالی که ما خشونت شما علیه معترضان را افشا میکنیم، فکر نکنید زندانیان سیاسی که حتی پیش از این اعتراضها زندانی شدهاند را فراموش کردهایم: نرگس محمدی، سپیده قلیان، جواد علیکردی، پوران ناظمی، رضا خندان، مجید توکلی ، شریفه محمدی ،حسین رونقی،… pic.twitter.com/K9fIOa4Vsy
— USAbehFarsi (@USABehFarsi) January 14, 2026
कौन हैं वो आठ लोग?
ईरान की जेल में बंद राजनीतिक बंदियों के नाम भी सार्वजनिक किया गया है. इस संबंध में कुल आठ राजनीतिक कैदियों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन इस समय ईरान की जेल से रिहा कराना चाहता है. इस सूची में जिन नामों को शामिल किया गया है, उनमें नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी, सपीदेह गोलियान, जवाद अली-कोर्दी, पूरान नाजेमी, रजा खंदान, मजीद तवक्कोली, शरीफेह मोहम्मदी और हुसैन रोनागी शामिल हैं.
ईरान में कब क्या हुआ?
ईरान की राजधानी तेहरान में पिछले साल 2025 में 28 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन शुरु हुआ था. इसके बाद धीरे-धीरे कई इलाकों में प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया था. आपको बता दें कि इससे पहले भी ईरान में बड़े-बड़े विरोध हो चुके हैं. इस बार के प्रदर्शन में अमेरिका भी खुले तौर पर ईरान के प्रदर्शनकारियों के साथ है. इसलिए यह विरोध तूल पकड़ता नजर आ रहा है.