भारत में एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति को लेकर एक नई समस्या उत्पन्न हो सकती है. खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी रुकावटों की वजह से देश की गैस आयात लाइन पर दबाव बढ़ा है, जिससे भारतीय गवर्नमेंट और सरकारी तेल कंपनियां “अलर्ट मोड” में आ गई हैं.
बता दें कि देश में एलपीजी (LPG) के घटते स्टॉक को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब अब घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर में केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर देने पर विचार कर रही है.
कम होगी गैस की मात्रा
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां घरेलू एलपीजी सिलेंडरों में गैस की मात्रा कम करने की एक प्रस्तावित योजना पर विचार कर रही हैं. अभी जो सामान्य 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर घर‑घर पहुंचते हैं, उनमें भरी जाने वाली गैस को लगभग 10 किलोग्राम तक सीमित करने का प्रस्ताव है, ताकि मौजूदा सीमित भंडार को लंबे समय तक चलाया जा सके और ज़्यादा घरों तक पहुंचाया जा सके. इस सुझाव का उद्देश्य “सप्लाई को बचाना और वितरण को व्यापक बनाना” बताया जा रहा है, न कि इसे सीधे तौर पर तुरंत लागू करना.
होर्मुज तनाव और एलपीजी आयात पर असर
भारत अपनी एलपीजी ज़रूरत का लगभग 60% हिस्सा विदेशों से आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के रास्ते आता है. यह रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. क्षेत्र में जारी संघर्ष और होर्मुज पर रुकावटों की वजह से यहां से आने वाले एलपीजी टैंकरों की गतिविधि काफ़ी प्रभावित हुई है, जिससे आयात में गिरावट और भारत के गैस भंडार पर दबाव बढ़ा है. मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से कई टैंकर पर्सियन गल्फ में ही इंतजार कर रहे हैं, जिससे गैस की उपलब्धता और भी संकरी हो गई है.
आम आदमी पर क्या होगा प्रभाव?
अगर यह योजना लागू होती है, तो औसत परिवार को 14.2 किलो के सिलेंडर में पहले की तुलना में लगभग 25–30% कम गैस मिलेगी, जिसका मतलब है कि सिलेंडर पहले की तरह लंबे समय तक नहीं चलेगा. हालांकि, रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि 10 किलोग्राम का रीफिल भी लगभग एक महीने तक चल सकता है, यानी पूरी तरह ब्रह्मांड उलट‑पुलट नहीं होगा, बल्कि उपयोग थोड़ा अधिक “सावधान” और “बचत” वाला हो जाएगा. सरकार और कंपनियां इस समय वैकल्पिक रूटों, जैसे अर्जेंटीना और अन्य गैर‑गल्फ सप्लायर्स से एलपीजी आयात बढ़ाकर भी स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं.