Harish Rana funeral Green Park Delhi 2026: हरीश राणा की कहानी धैर्य पीड़ा और एक महान त्याग की महागाथा है, 13 साल पहले एक हादसे या बीमारी के बाद हरीश कोमा में चले गए थे, जिसके बाद से उनका परिवार दिन-रात उनकी सेवा में जुटा था, एम्स दिल्ली में इलाज के दौरान मंगलवार शाम उनकी हृदय गति रुक गई, जहां एक ओर परिवार इस लंबे वियोग से टूट चुका था, वहीं दूसरी ओर उन्होंने समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझा, हरीश के अंगों से अब एक हृदय रोगी को नया जीवन मिलेगा और दो दृष्टिहीन लोग इस खूबसूरत दुनिया को देख सकेंगे, ग्रीन पार्क में जब हरीश का शव पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं, लोगों ने उन्हें एक 'योद्धा' के रूप में विदा किया जिसने ना केवल अपनी बीमारी से लंबी जंग लड़ी, बल्कि मृत्यु के बाद भी परोपकार का मार्ग चुना, यह घटना दिल्ली और पूरे देश के लिए अंगदान के प्रति जागरूकता का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है, परिवार के इस कदम की चारों ओर सराहना हो रही है.