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नए साल पर लॉन्च हो सकती है वंदे भारत स्लीपर ट्रेन! इन खासियतों के साथ पकड़ेगी हवा की रफ्तार

लंबे समय से वंदे भारत की स्लीपर ट्रेन के शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है. वहीं अब कयास लगाए जा रहे हैं कि ये इंतजार जल्द खत्म होने वाला है. इसे 2026 की शुरुआत में शुरू किया जा सकता है.

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New Year Gift Vande Bharat Sleeper: भारत की पहली सेमी-हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेन, वंदे भारत स्लीपर के लॉन्च को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं. एक के बाद एक तारीखों पर इसके लॉंचिंग की बात सामने आ रही है. अब कहा जा रहा है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को नए साल पर लॉन्च किया जा सकता है.जानकारी के अनुसार, ट्रेन का दूसरा रैक अब तैयार हो गया है और बेंगलुरु में खड़ा है. बेंगलुरु में खड़ा है. इस ट्रेन को पब्लिक सेक्टर कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने बेंगलुरु में बनाया है. हाल ही में इसे आगे की प्रक्रियाओं के लिए भारतीय रेलवे को सौंप दिया गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो ट्रेन का दूसरा रैक अभी सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल (SMVT) रेलवे स्टेशन पर है. चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के एक सीनियर अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि रैक सोमवार सुबह स्टेशन पर पहुंचा था. आगे की प्रक्रिया शुरू करने से पहले इसे दो-तीन दिन वहीं रखे जाने की उम्मीद है.

लंबी दूरी के लिए डिजाइन की गई वंदे भारत स्लीपर

बता दें कि वंदे भारत स्लीपर को लंबी दूरी की यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि रात भर सफर करने वाले यात्री आरामपूर्वक अपनी यात्रा का आनंद ले सकें. ये ट्रेन खासकर उन रूट्स के लिए डिजाइन की गई है, जो 800 से 1,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबे हैं. मौजूदा वंदे भारत ट्रेनों में आरामदायक बैठने की सुविधा दी गई है. हालांकि लंबे सफर के यात्रियों को इससे परेशानी हो सकती है. ऐसे में इस ट्रेन में अन्य सुविधाओं की तरह सोने की सुविधा दी गई है.

कितनी होगी स्पीड?

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे तक की स्पीड से चलने में सक्षम है. इसे तेज एक्सेलेरेशन और ब्रेकिंग के लिए बनाया गया है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इस ट्रेन की असल  ऑपरेटिंग स्पीड रेलवे ट्रैक की स्थिति पर निर्भर करेगी. इसकी वजह ये है कि भारत में अभी सिर्फ कुछ हिस्सों में ही 150 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा की स्पीड को सपोर्ट किया जाने वाला ट्रैक है.

इस रूट पर भरेगी फर्राटा

वहीं बेंगलुरु में मौजूद इस रैक में 16 कोच हैं. इन्हें तीन एयर-कंडीशन्ड क्लास में बांटा गया है. इसमें फर्स्ट एसी, सेकेंड एसी और थर्ड एसी हैं. वहीं ये ट्रेन पहले रूट में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू और कश्मीर जैसे राज्यों के कई बड़े शहरों को कवर कर सकती है. इनमें दिल्ली अंबाला, मुरादाबाद, कानपुर, जयपुर और जोधपुर शामिल हो सकते हैं. हालांकि भारतीय रेलवे ने अभी तक पहली कमर्शियल रन के लिए रूट की घोषणा नहीं की है.

मार्च 2026 तक 8 और स्लीपर रैक देंगी दस्तक

अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फाइनल मंज़ूरी से पहले कुछ छोटी-मोटी टेक्निकल दिक्कतों की जांच की जा रही है. इसके बाद इसका ट्रायल रन किया जा सकता है. वहीं जानकारी मिली है कि इंडियन रेलवे मार्च 2026 तक आठ और स्लीपर रैक बनाने की योजना बना रहा है. ये 10 रेक शुरू में पांच स्लीपर सर्विस चलाने के लिए काफी होंगे.

अप्रूवल के बाद नॉर्दर्न रेलवे जोन को सौंपी जाएंगी ट्रेन

वहीं सभी औपचारिक अप्रूवल पूरे होने के बाद, ट्रेन नॉर्दर्न रेलवे जोन को सौंप दी जाएगी. हालांकि रेलवे बोर्ड ने अभी तक लॉन्च की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पहली सर्विस नए साल के तोहफे के तौर पर शुरू की जा सकती है. हालांकि पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि इसे 2025 के अंत तक शुरू किया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने से पहले यह प्रोजेक्ट अब आखिरी स्टेज पर है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे नए साल पर जनवरी में शुरू किया जा सकता है.

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