दादी के हार में छिपा GPS ट्रैकर! पोते की ये हरकत बन गई चर्चा का विषय

मुंबई में एक लापता बुजुर्ग महिला को उसके पोते ने GPS ट्रैकर की मदद से ढूंढ निकाला. उसने अपनी दादी की सुरक्षा के लिए पहले ही उनके हार में एक GPS डिवाइस लगा दिया था, जिससे उन्हें ढूंढना बहुत आसान हो गया. आइए जानते हैं पूरी कहानी.

मुंबई में एक पोते ने अपनी लापता दादी को नाटकीय तरीके से ढूंढ निकाला. पोते ने अपनी दादी को ढूंढने के लिए GPS ट्रैकर का इस्तेमाल किया. यह घटना दक्षिण मुंबई में हुई, जहां 3 दिसंबर की शाम को सायरा नाम की एक बुजुर्ग महिला हमेशा की तरह टहलने निकलीं, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटीं.
जानकारी के अनुसार, सेवरी इलाके में एक दोपहिया वाहन से टक्कर में महिला घायल हो गईं, जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया. परिवार को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इसी दौरान, सायरा के पोते वसीम को याद आया कि उसने अपनी दादी की सुरक्षा के लिए उनके हार में एक GPS ट्रैकर लगाया था.

दादी को कैसे ढूंढा गया

वसीम ने अपने मोबाइल फोन पर GPS खोला और लोकेशन ट्रैक की. लोकेशन पर परेल में एक प्राइवेट अस्पताल दिखा. परिवार तुरंत अस्पताल पहुंचा, जहां सायरा भर्ती थीं. इसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया गया.

मिनी GPS ट्रैकर्स की बढ़ती लोकप्रियता

आजकल, बाजार में कई तरह के मिनी GPS ट्रैकर्स उपलब्ध हैं, जिन्हें बुजुर्गों, बच्चों, पालतू जानवरों, वाहनों, बैग आदि से जोड़ा जा सकता है. देश में कई कंपनियां पहनने योग्य GPS ट्रैकर्स बेच रही हैं. इन्हें हार की तरह भी पहना जा सकता है. बाजार में कई लोकप्रिय विकल्प उपलब्ध हैं.

कितनी है कीमत

ये ट्रैकर्स बहुत ही किफायती कीमत पर मिलते हैं. आप इन्हें ऑनलाइन या ऑफलाइन स्टोर से 1000 से 4000 रुपये के बीच खरीद सकते हैं. इसकी मदद से आप अपने परिवार के सदस्यों को ट्रैक कर सकते हैं, और अपनी ज़रूरी चीज़ों, वॉलेट और कार पर भी नज़र रख सकते हैं.

Shivashakti narayan singh

मूल रूप से चन्दौली जनपद के निवासी शिवशक्ति नारायण सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. वर्तमान में वे इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. एस्ट्रो (ज्योतिष) और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा हेल्थ और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं.तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है.डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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