नए SIM बाइंडिंग नियम क्या हैं?
इन नियमों के तहत, अगर आप अपने मोबाइल डिवाइस से SIM कार्ड हटाते हैं, तो WhatsApp, Telegram, Snapchat, ShareChat और दूसरे एप्लिकेशन काम करना बंद कर देंगे. यहां तक कि WhatsApp वेब वर्शन भी हर छह घंटे में अपने आप लॉग आउट हो जाएगा, जिसके लिए री-ऑथेंटिकेशन की जरूरत होगी.
इसका आप पर क्या असर होगा?
सरकार इसे क्यों लागू कर रही है?
साइबर फ्रॉड रोकने के इन तरीकों का मुख्य मकसद डिजिटल क्राइम के बढ़ते मामलों पर रोक लगाना है. मैसेजिंग ऐप्स को फिजिकल SIM कार्ड से जोड़कर, अधिकारियों का मकसद फ्रॉड करने वालों के लिए दूर की जगहों या अलग-अलग डिवाइस से फोन नंबर का गलत इस्तेमाल करना काफी मुश्किल बनाना है. मंत्री सिंधिया ने कहा कि ये नियम नेशनल सिक्योरिटी और फ्रॉड रोकने के लिए लागू किए गए हैं. सरकार सिक्योरिटी के मामलों से कोई समझौता नहीं करेगी.
इंडस्ट्री की चिंताएं और विरोध
नियमों का पालन न करने के नतीजे
अब यूज़र्स को क्या करना चाहिए?
1 मार्च के बाद बिना रुकावट सर्विस पक्का करने के लिए, इन बातों का ध्यान रखें:
- अपना रजिस्टर्ड SIM कार्ड अपने प्राइमरी डिवाइस में लगाकर रखें
- WhatsApp Web पर ज़्यादा बार लॉगइन करने के लिए तैयार रहें
- नियम और शर्तों के हिसाब से अपने ऐप्स को लेटेस्ट वर्शन में अपडेट करें
- अपने फ़ोन से बिना वजह SIM कार्ड निकालने से बचें
जैसे-जैसे भारत डिजिटल सिक्योरिटी की ओर यह बड़ा कदम उठा रहा है, यूज़र्स को इन बदलावों के हिसाब से खुद को ढालना होगा. हालांकि इस कदम का मकसद नागरिकों को साइबर खतरों से बचाना है, लेकिन आने वाले हफ़्तों में पता चलेगा कि देश के बड़े यूज़र बेस के लिए यह बदलाव कितनी आसानी से होता है.