Bharti Airtel Employee Allegation: यह मामला कॉर्पोरेट शोषण की एक दर्दनाक तस्वीर पेश करता है सेल्स एग्जीक्यूटिव, जिसने एयरटेल की ग्रोथ में 17 साल का योगदान दिया, अब अपने ही हक के लिए कानूनी और आर्थिक लड़ाई लड़ रहा है, ग्रेच्युटी पेमेंट एक्ट 1972 के अनुसार, 5 साल से अधिक सेवा देने वाला हर कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार होता है, फिर 17 साल बाद भी इसे रोकना गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है, कर्मचारी का कहना है कि वफादारी का इनाम उसे बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के रूप में मिला है, यह घटना दर्शाती है कि कैसे 'जॉब टर्मिनेशन' के बाद कंपनियां अक्सर अपने पुराने कर्मचारियों को भूल जाती हैं, इस खुलासे ने लेबर कोर्ट और सरकारी रेगुलेटर्स का ध्यान भी इस ओर खींचा है अगर ये आरोप सच साबित होते हैं, तो यह भारती एयरटेल की ब्रांड इमेज के लिए एक बड़ा शॉकिंग सेटबैक हो सकता है, अब जनता और अन्य कर्मचारी संगठन न्याय की मांग कर रहे हैं.
भारती एयरटेल में करीब दो दशकों तक अपना खून-पसीना एक करने वाले एक पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, पीड़ित का दावा है कि 17 साल की लंबी और वफादार सेवा के बाद जब उसे नौकरी से निकाला गया, तो कंपनी ने उसे खाली हाथ विदा कर दिया, आरोप है कि उसे PF (प्रोविडेंट फंड), ग्रेच्युटी और अन्य कोई भी वित्तीय लाभ नहीं दिया गया, जो एक कर्मचारी का कानूनी अधिकार होता है, यह मामला अब सोशल मीडिया पर कॉर्पोरेट जवाबदेही और कर्मचारी अधिकारों को लेकर एक बड़ी बहस बन गया है, लोग पूछ रहे हैं कि अगर इतने बड़े ब्रांड के साथ काम करने वाले कर्मचारी का यह हाल है, तो छोटे संस्थानों में क्या होता होगा? पीड़ित के इन दावों ने एम्प्लॉई राइट्स पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.
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