मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले की सीमा पर स्थित ढोड़न बांध (केन-बेतवा लिंक परियोजना) के निर्माण स्थल पर पिछले 11 दिनों से आदिवासियों का विशाल धरना जारी है प्रभावित परिवारों, विशेषकर महिलाओं ने बुधवार को 'पंचतत्व आंदोलन' के तहत प्रकृति के पांच तत्वों की शपथ लेकर विरोध जताया, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने फर्जी ग्राम सभाएं दिखाकर उनकी ज़मीनें छीन ली हैं और उचित मुआवजा व पुनर्वास (Rehabilitation) अब तक नहीं मिला है, एक महिला प्रदर्शनकारी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए उग्र रास्ता अपनाने या हथियार उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगी.
Panchtatva Andolan Tribal Women Chhatarpur: यह आंदोलन अब केवल मुआवजे की मांग नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है इससे पहले महिलाएं जलती चिताओं पर लेटकर ‘चिता आंदोलन’ कर चुकी हैं वे पानी के अंदर खड़े होकर भी विरोध जता रही हैं, 11 दिन बीत जाने के बाद भी किसी वरिष्ठ अधिकारी के ना पहुंचने से आदिवासियों में भारी आक्रोश है, उनका कहना है कि सरकार केवल उद्योगपतियों और बड़े शहरों का सोच रही है प्रोजेक्ट के कारण करीब 40 गांवों के हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं, आदिवासियों का कहना है कि उनके लिए जंगल ही उनकी पहचान और आजीविका है, जिसे बांध के लिए खत्म किया जा रहा है इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और धारा 163 (BNSS) लागू की गई है, लेकिन आदिवासियों ने साफ कर दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, वे पीछे नहीं हटेंगे.
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