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HomeVideosशिक्षा के नाम पर करोड़ों का धंधा, लखनऊ के CMS स्कूल ने किताबों पर मचाई लूट,क्या शिक्षा अब सिर्फ अमीरों के लिए है?

शिक्षा के नाम पर करोड़ों का धंधा, लखनऊ के CMS स्कूल ने किताबों पर मचाई लूट,क्या शिक्षा अब सिर्फ अमीरों के लिए है?

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-25 08:50:51

लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल (CMS) के एक अभिभावक ने सोशल मीडिया पर किताबों की रसीद साझा करते हुए अपनी व्यथा व्यक्त की है, कक्षा 5 की महज सात किताबों की कीमत ₹4,439 है, जिसमें अभी स्टेशनरी (कॉपी, पेन, पेंसिल) और अन्य आवश्यक सामग्री का खर्च जुड़ना बाकी है,अभिभावक का आरोप है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की हालत दयनीय है और जनता को गैर-जरूरी मुद्दों में उलझाकर रखा जा रहा है, उनका तर्क है कि जहां रसूखदार लोगों के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं, वहीं देश के आम बच्चों के लिए शिक्षा इतनी महंगी कर दी गई है कि वह पहुंच से बाहर होती जा रही है.


City Montessori School Lucknow Book Price 2026: यह मुद्दा केवल एक रसीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निजी स्कूलों द्वारा की जा रही ‘आर्थिक मनमानी’ की ओर इशारा करता है, लखनऊ के CMS स्कूल की किताबों की कीमतों ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या निजी पब्लिशर्स के साथ मिलकर स्कूल मोटा कमीशन कमा रहे हैं?  कक्षा 5 जैसी प्राथमिक स्तर की कक्षा के लिए सिर्फ 7 किताबों का मूल्य ₹4,439 होना तर्कहीन लगता है, जबकि सरकारी मानकों (NCERT) के अनुसार यह खर्च बहुत कम होना चाहिए, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सुधार के बजाय आम जनता को जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों में उलझाया जा रहा है, अभिभावकों का मानना है कि यदि शिक्षा की लागत इसी तरह बढ़ती रही, तो आम परिवारों के बच्चों के लिए अच्छी पढ़ाई एक सपना बनकर रह जाएगी, सोशल मीडिया पर यह पोस्ट उन हजारों माता-पिता की आवाज बन गई है जो हर साल नए सत्र (Session) की शुरुआत में भारी-भरकम फीस और महंगे बुक-सेट्स के कारण मानसिक और आर्थिक दबाव झेलते हैं.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-25 08:50:51


City Montessori School Lucknow Book Price 2026: यह मुद्दा केवल एक रसीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निजी स्कूलों द्वारा की जा रही ‘आर्थिक मनमानी’ की ओर इशारा करता है, लखनऊ के CMS स्कूल की किताबों की कीमतों ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या निजी पब्लिशर्स के साथ मिलकर स्कूल मोटा कमीशन कमा रहे हैं?  कक्षा 5 जैसी प्राथमिक स्तर की कक्षा के लिए सिर्फ 7 किताबों का मूल्य ₹4,439 होना तर्कहीन लगता है, जबकि सरकारी मानकों (NCERT) के अनुसार यह खर्च बहुत कम होना चाहिए, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सुधार के बजाय आम जनता को जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों में उलझाया जा रहा है, अभिभावकों का मानना है कि यदि शिक्षा की लागत इसी तरह बढ़ती रही, तो आम परिवारों के बच्चों के लिए अच्छी पढ़ाई एक सपना बनकर रह जाएगी, सोशल मीडिया पर यह पोस्ट उन हजारों माता-पिता की आवाज बन गई है जो हर साल नए सत्र (Session) की शुरुआत में भारी-भरकम फीस और महंगे बुक-सेट्स के कारण मानसिक और आर्थिक दबाव झेलते हैं.

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