अस्पतालों में ग्राउंड स्टाफ (Ground Staff) और वार्ड बॉयज के बीच तालमेल की कमी और संवेदनहीनता का शिकार अक्सर आम मरीज होते हैं, कई बार देखा गया है कि अस्पताल के पास पर्याप्त व्हीलचेयर होने के बावजूद, स्टाफ उन्हें केवल इसलिए नहीं निकालता क्योंकि उन्हें "रजिस्टर में एंट्री" करने या "व्हीलचेयर वापस लाने" की आलस होती है, जब कोई तीमारदार मिन्नतें करता है, तो उसे एक काउंटर से दूसरे काउंटर पर दौड़ाया जाता है यह स्टाफ की लापरवाही ही है.
Hospital Staff Rude Behavior Wheelchair Issue: यह समस्या स्टाफ की ट्रेनिंग और उनके ‘एम्पैथी’ (समानुभूति) की कमी को उजागर करती है, एक अस्पताल स्टाफ का प्राथमिक कर्तव्य मरीज की सुरक्षा और सुविधा है, व्हीलचेयर देने से मना करना या उसमें देरी करना प्रोफेशनल मिसकंडक्ट के अंतर्गत आता है अक्सर स्टाफ को लगता है कि “इलाज तो हो गया, अब हमारा क्या लेना-देना, यह मानसिकता सेवा क्षेत्र (Service Sector) के लिए घातक है, अस्पताल प्रबंधन अपने निचले स्तर के स्टाफ पर निगरानी नहीं रखता, जिससे उनकी मनमानी बढ़ जाती है व्हीलचेयर को ताले में बंद रखना या बिना ‘टिप’ के उसे ना देना एक बड़ा भ्रष्टाचार है, बीमारी से लड़कर बाहर निकल रहे व्यक्ति के लिए स्टाफ का ऐसा रूखा व्यवहार किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं है.
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