मध्य प्रदेश के इंदौर में रहने वाले टैक्सी ड्राइवर अभिषेक पाटिल की खुदकुशी ने प्रशासनिक भ्रष्टाचार के घृणित चेहरे को उजागर कर दिया है, अभिषेक की टैक्सी का एक कार के साथ एक्सीडेंट हो गया था, कार मालिक ने मौके पर ₹25,000 के हर्जाने की मांग की मामला थाने पहुंचा, तो वहां रक्षक ही भक्षक बन गए आरोप है कि संबंधित पुलिस अधिकारी ने टैक्सी छोड़ने के बदले अभिषेक से ₹50,000 की रिश्वत मांगी, कुल ₹75,000 की मांग और पुलिस के दबाव से अभिषेक टूट गया। घर लौटकर उसने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली.
Indore Taxi Driver Abhishek Patil Suicide Case: यह मामला केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई ‘संस्थानिक हत्या’ की ओर इशारा करता है, अभिषेक पहले से ही एक्सीडेंट और कार मालिक की मांग से परेशान था, थाने में उसे न्याय और सुरक्षा मिलने के बजाय भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा एक टैक्सी ड्राइवर जिसकी पूरी कमाई ही कुछ हजार रुपये होती है, उससे ₹50,000 की मांग करना अमानवीयता की हद है, अभिषेक का सुसाइड नोट उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ सबसे मजबूत कानूनी सबूत है नियमों के मुताबिक, किसी भी मामले में बिना रसीद या कानूनी प्रक्रिया के पैसे मांगना ‘एक्स्टॉर्शन’ (जबरन वसूली) है, इंदौर में इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और टैक्सी ड्राइवरों में भारी गुस्सा है, लोग दोषी पुलिस अधिकारी की तुरंत गिरफ्तारी और अभिषेक के परिवार को मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन मरने से पहले एक सुसाइड नोट में अपनी पूरी आपबीती लिखी, जिसे अब उसका ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ माना जा रहा है.
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