300 Untraced Girls J&K NCRB Data: जम्मू-कश्मीर में लापता नाबालिग लड़कियों का मुद्दा एक मानवीय संकट का रूप ले चुका है, गृह मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों ने इस ओर सबका ध्यान खींचा है, कुल 509 मामलों में से 300 लड़कियों का अब भी पता ना चलना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है, यह आंकड़ा केवल फ्रेश केस ही नहीं बल्कि पिछले वर्षों के लंबित मामलों (Backlog) को भी शामिल करता है, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य का विषय है, इसलिए मुख्य जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर प्रशासन की है हालांकि, केंद्र सरकार मिशन वात्सल्य, ट्रैकचाइल्ड पोर्टल और 112 (ERSS) जैसी सुविधाओं के माध्यम से मदद कर रही है, अब किसी भी बच्चे की गुमशुदगी पर तुरंत FIR दर्ज करना अनिवार्य है, जिसे शुरुआती तौर पर ‘अपहरण’ या ‘तस्करी’ मानकर जांच की जाती है, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोग मांग कर रहे हैं कि इन लापता बेटियों को वापस लाने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जाए और मानव तस्करी (Trafficking) जैसे पहलुओं की गहराई से जांच हो, यह स्थिति मांग करती है कि केवल तकनीकी पोर्टल्स पर निर्भर ना रहकर ज़मीनी स्तर पर पुलिस की सूचना तंत्र (Intelligence) को मजबूत किया जाए ताकि उन 300 परिवारों को उनकी बेटियां वापस मिल सकें.
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