Madhavi Latha Airport Prayer Room Controversy 2026: यह विवाद ‘सार्वजनिक संपत्ति’ और ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ के बीच के संतुलन पर एक बड़ी बहस छेड़ता है, एयरपोर्ट पर ‘प्रार्थना कक्ष’ या ‘मेडिटेशन रूम’ एक सार्वजनिक संपत्ति होते हैं, ये किसी विशेष धर्म के लिए आरक्षित नहीं होते, बल्कि सभी धर्मों (All Faiths) के यात्रियों के लिए बनाए जाते हैं ताकि वे शांति से अपनी धार्मिक क्रियाएं कर सकें, इंटरनेट पर यूजर्स तर्क दे रहे हैं कि विदेशों में उड़ानों के दौरान ‘लॉर्ड जीसस क्राइस्ट’ की प्रार्थना करना या ताली बजाना स्वीकार्य है, तो भारत के एयरपोर्ट पर स्थित एक निर्धारित प्रार्थना कक्ष में हिंदू मंत्रों का पाठ करना ‘हमला’ क्यों माना जा रहा है? समर्थकों का कहना है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और उसका अभ्यास करने की आजादी देता है, विशेष रूप से उस स्थान पर जो इसी कार्य के लिए बनाया गया है, सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या ‘धर्मनिरपेक्षता’ (Secularism) का अर्थ केवल कुछ विशेष धर्मों को सार्वजनिक स्थलों पर जगह देना है, या इसमें हिंदू धर्म की प्रार्थनाओं के लिए भी समान सम्मान शामिल है? यह मामला स्पष्ट करता है कि जब तक प्रार्थना कक्ष का उपयोग शांतिपूर्वक और नियमों के भीतर हो रहा है, तब तक किसी भी धर्म की प्रार्थना पर आपत्ति उठाना भेदभावपूर्ण माना जा सकता है.
7