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HomeVideosमाधवी लता की ‘दुर्गा स्तुति’ पर बवाल! एयरपोर्ट के प्रेयर रूम में प्रार्थना पर उठाये सवाल, उदाहरण देकर विरोधियों को दिया करारा जवाब

माधवी लता की ‘दुर्गा स्तुति’ पर बवाल! एयरपोर्ट के प्रेयर रूम में प्रार्थना पर उठाये सवाल, उदाहरण देकर विरोधियों को दिया करारा जवाब

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-26 15:23:39

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें के. माधवी लता एयरपोर्ट के अंदर बने आधिकारिक 'प्रार्थना कक्ष' (Prayer Room) में बैठकर दुर्गा स्तुति का पाठ कर रही हैं, इस वीडियो के सामने आते ही इंटरनेट दो धड़ों में बंट गया है, आलोचकों का तर्क है कि सार्वजनिक स्थलों पर इस तरह का धार्मिक प्रदर्शन नहीं होना चाहिए, जबकि समर्थकों का कहना है कि एयरपोर्ट के प्रेयर रूम इसीलिए बनाए गए हैं ताकि यात्री अपनी पसंद के अनुसार ईश्वर की इबादत या प्रार्थना कर सकें साथ ही, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों के उदाहरण दिए जा रहे हैं जहां उड़ानों के दौरान या एयरपोर्ट्स पर ईसाई धर्म से जुड़ी प्रार्थनाएं सामान्य मानी जाती हैं.


Madhavi Latha Airport Prayer Room Controversy 2026: यह विवाद ‘सार्वजनिक संपत्ति’ और ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ के बीच के संतुलन पर एक बड़ी बहस छेड़ता है, एयरपोर्ट पर ‘प्रार्थना कक्ष’ या ‘मेडिटेशन रूम’ एक सार्वजनिक संपत्ति होते हैं, ये किसी विशेष धर्म के लिए आरक्षित नहीं होते, बल्कि सभी धर्मों (All Faiths) के यात्रियों के लिए बनाए जाते हैं ताकि वे शांति से अपनी धार्मिक क्रियाएं कर सकें, इंटरनेट पर यूजर्स तर्क दे रहे हैं कि विदेशों में उड़ानों के दौरान ‘लॉर्ड जीसस क्राइस्ट’ की प्रार्थना करना या ताली बजाना स्वीकार्य है, तो भारत के एयरपोर्ट पर स्थित एक निर्धारित प्रार्थना कक्ष में हिंदू मंत्रों का पाठ करना ‘हमला’ क्यों माना जा रहा है? समर्थकों का कहना है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और उसका अभ्यास करने की आजादी देता है, विशेष रूप से उस स्थान पर जो इसी कार्य के लिए बनाया गया है, सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या ‘धर्मनिरपेक्षता’ (Secularism) का अर्थ केवल कुछ विशेष धर्मों को सार्वजनिक स्थलों पर जगह देना है, या इसमें हिंदू धर्म की प्रार्थनाओं के लिए भी समान सम्मान शामिल है? यह मामला स्पष्ट करता है कि जब तक प्रार्थना कक्ष का उपयोग शांतिपूर्वक और नियमों के भीतर हो रहा है, तब तक किसी भी धर्म की प्रार्थना पर आपत्ति उठाना भेदभावपूर्ण माना जा सकता है.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-26 15:23:39


Madhavi Latha Airport Prayer Room Controversy 2026: यह विवाद ‘सार्वजनिक संपत्ति’ और ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ के बीच के संतुलन पर एक बड़ी बहस छेड़ता है, एयरपोर्ट पर ‘प्रार्थना कक्ष’ या ‘मेडिटेशन रूम’ एक सार्वजनिक संपत्ति होते हैं, ये किसी विशेष धर्म के लिए आरक्षित नहीं होते, बल्कि सभी धर्मों (All Faiths) के यात्रियों के लिए बनाए जाते हैं ताकि वे शांति से अपनी धार्मिक क्रियाएं कर सकें, इंटरनेट पर यूजर्स तर्क दे रहे हैं कि विदेशों में उड़ानों के दौरान ‘लॉर्ड जीसस क्राइस्ट’ की प्रार्थना करना या ताली बजाना स्वीकार्य है, तो भारत के एयरपोर्ट पर स्थित एक निर्धारित प्रार्थना कक्ष में हिंदू मंत्रों का पाठ करना ‘हमला’ क्यों माना जा रहा है? समर्थकों का कहना है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और उसका अभ्यास करने की आजादी देता है, विशेष रूप से उस स्थान पर जो इसी कार्य के लिए बनाया गया है, सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या ‘धर्मनिरपेक्षता’ (Secularism) का अर्थ केवल कुछ विशेष धर्मों को सार्वजनिक स्थलों पर जगह देना है, या इसमें हिंदू धर्म की प्रार्थनाओं के लिए भी समान सम्मान शामिल है? यह मामला स्पष्ट करता है कि जब तक प्रार्थना कक्ष का उपयोग शांतिपूर्वक और नियमों के भीतर हो रहा है, तब तक किसी भी धर्म की प्रार्थना पर आपत्ति उठाना भेदभावपूर्ण माना जा सकता है.

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