आज के दौर में असली महिला सशक्तिकरण का मतलब बदल गया है, अब गांव की महिलाएं केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं इंटरनेट ने उन्हें वह ताकत दी है कि वे अपनी 'इज्जत' और 'हक' के लिए सरेआम आवाज उठा सकें, चाहे वह किसी सरकारी दफ्तर में भ्रष्टाचार हो या समाज की कोई पुरानी रूढ़िवादी परंपरा, एक छोटा सा वीडियो बनाकर वे पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं, यह डिजिटल साहस ही है जिसने उन्हें समाज में एक नई पहचान और सुरक्षा कवच प्रदान किया है.
Rural Women Power Internet Video: यह ‘चटपटा’ बदलाव असल में एक बड़ी सामाजिक क्रांति का हिस्सा है, सोशल मीडिया के आने से पहले गांव की महिलाएं अपनी शिकायतों को दबा लेती थीं, लेकिन अब “कैमरा ऑन” होते ही उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होता है, ग्रामीण क्षेत्रों में अब ‘वीडियो वायरल’ होने का खौफ किसी भी कानूनी धारा से ज्यादा काम करता है, अब इंटरनेट केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि गांव की औरतों के लिए ‘वर्चुअल थाना’ और ‘डिजिटल पंचायत’ बन चुका है, जब एक महिला अपने अधिकारों के लिए निडर होकर कैमरे के सामने बोलती है, तो वह पूरे गांव की सोच बदलने की ताकत रखती है.
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