Solar Eclipse 2027: 6 फरवरी 2027 को आसमान में बेहद खास वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. ग्रहण के अधिकतम चरण में चंद्रमा सूर्य के करीब 93 फीसदी हिस्से को ढक सकता है और लगभग 7 मिनट 51 सेकंड तक सूर्य के चारों ओर चमकता हुआ छल्ला दिखाई दे सकता है. यह नजारा भारत से रिंग ऑफ फायर के रूप में नहीं दिखेगा और इसका मुख्य मार्ग दक्षिण अमेरिका व पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगा.
2027 में दिखेगा ‘रिंग ऑफ फायर
Solar Eclipse 2027: साल 2027 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है. इस साल आसमान में होने वाली कई दुर्लभ घटनाओं के बीच 6 फरवरी को एक शानदार वलयाकार सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा. इस दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने आकर उसके बीच के हिस्से को ढक देगा, लेकिन सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाएगा. नतीजा यह होगा कि सूर्य के चारों ओर रोशनी का एक चमकता हुआ गोल घेरा दिखाई देगा. इसी नजारे को ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी आग का छल्ला कहा जाता है. इस ग्रहण की सबसे खास बात इसकी अवधि होगी. ग्रहण के सबसे बड़े चरण में सूर्य के चारों ओर चमकता हुआ छल्ला करीब 7 मिनट 51 सेकंड तक दिखाई दे सकता है. हालांकि, यह खगोलीय नजारा दुनिया के हर हिस्से से नहीं देखा जा सकेगा.
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है. लेकिन वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है. इस कारण वह आसमान में थोड़ा छोटा दिखाई देता है और सूर्य की पूरी डिस्क को ढक नहीं पाता. ऐसे में सूर्य का बीच वाला हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाता है, जबकि उसके किनारों से सूर्य की रोशनी बाहर दिखाई देती रहती है. यही रोशनी चंद्रमा के चारों ओर चमकते हुए गोल घेरे का रूप ले लेती है. इसी वजह से इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है.
नासा के अनुसार, 6 फरवरी 2027 के वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के करीब 93 प्रतिशत हिस्से को ढक सकता है. ग्रहण के अधिकतम चरण में सूर्य के चारों ओर बना चमकता हुआ छल्ला लगभग 7 मिनट 51 सेकंड तक नजर आ सकता है. ग्रहण की यह लंबी अवधि इसे साल 2027 की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में शामिल करती है. आसमान में एक तरफ अंधेरा-सा प्रभाव बनेगा, जबकि सूर्य के चारों ओर चमकता हुआ गोल घेरा दिखाई देगा.
भारत में रहने वाले लोगों के लिए इस ग्रहण की एक निराशाजनक बात यह है कि 6 फरवरी 2027 का वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत से रिंग ऑफ फायर के रूप में दिखाई नहीं देगा. इस खगोलीय घटना का मुख्य मार्ग दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगा. दक्षिण अमेरिका में चिली और अर्जेंटीना के कुछ हिस्सों में इसे बेहतर तरीके से देखा जा सकेगा. इसके अलावा ग्रहण का रास्ता उरुग्वे और ब्राजील के कुछ हिस्सों के पास से भी गुजरने वाला है. अटलांटिक महासागर को पार करने के बाद ग्रहण पश्चिमी अफ्रीका के कुछ इलाकों में दिखाई देगा. इनमें कोट द आइवोर, घाना, टोगो, बेनिन और नाइजीरिया के कुछ हिस्से शामिल हैं.
इस ग्रहण के लंबे समय तक चलने के पीछे पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की स्थिति अहम भूमिका निभाएगी. ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होगा, इसलिए उसका आकार हमें थोड़ा छोटा दिखाई देगा. वहीं, पृथ्वी सूर्य के करीब होने की स्थिति में होगी, जिसके कारण सूर्य हमें थोड़ा बड़ा नजर आएगा. इस आकार के अंतर की वजह से चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा और उसके चारों ओर सूर्य की रोशनी का चमकता हुआ घेरा बना रहेगा. वलयाकार सूर्य ग्रहण देखने के दौरान भी सावधानी बेहद जरूरी है. इसे सीधे नंगी आंखों से देखने पर आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. सामान्य धूप के चश्मे भी सूर्य ग्रहण देखने के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते.
साल 2027 में केवल एक नहीं, बल्कि दो सूर्य ग्रहण होंगे. पहला सूर्य ग्रहण 6 फरवरी को वलयाकार होगा, जबकि दूसरा 2 अगस्त 2027 को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. इसके अलावा 2027 में तीन चंद्र ग्रहण भी होंगे. यानी खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए पूरा साल बेहद खास रहने वाला है.
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