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जेल तक पहुंचा सकता है बाउंस चेक! जानें क्या हैं इसके कानून, सजा और बचाव के उपाय

Cheque Bounce Explained: हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को बाउंस चेक की एक गलती के कारण जेल जाना पड़ा. इस घटना से लोगों के मन में चेक बाउंस को लेकर कई सवाल हैं. तो चलिए जानते हैं सबकुछ इस लेख में.

Cheque Bounce Explained Story: चेक बाउंस होना भले ही मामूली सी गलती लगे, लेकिन इससे जल्दी ही जुर्माना, क्रेडिट स्कोर में गिरावट और यहां तक ​​कि कानूनी पचड़े भी खड़े हो सकते हैं. एक साधारण भुगतान की गलती गंभीर वित्तीय नुकसान में तब्दील हो सकती है. क्या आप इन जोखिमों से अवगत हैं? हाल ही में कुछ ऐसा अभिनेता राजपाल यादव के साथ हुआ. जानिए चेक बाउंस के क्या हैं नियम, और क्या है कानूनी जोखिम. साथ ही जानेंगे इस गलती से बचने के उपाय. 

क्या है चेक बाउंस?

चेक बाउंस होने का सबसे आम कारण अपर्याप्त धनराशि है. यदि खाते में चेक पर लिखी राशि के बराबर धनराशि नहीं है, तो बैंक उसे स्वीकार करने से इनकार कर देगा. थोड़ी सी भी धनराशि की कमी होने पर चेक वापस आ सकता है. हस्ताक्षरों का मेल न खाना भी एक आम कारण है. बैंक अपने रिकॉर्ड के अनुसार चेक पर मौजूद हस्ताक्षरों का सावधानीपूर्वक मिलान करते हैं. यदि हस्ताक्षर मेल नहीं खाते हैं, तो धोखाधड़ी से बचाव के लिए चेक को अस्वीकार किया जा सकता है. इतना ही नहीं, चेक की डिटेल्स भरन में साधारण गलतियां भी समस्याएं पैदा कर सकती हैं.

चेक बाउंस होने के सामान्य कारण :

  • अपर्याप्त राशि
  • गलत तिथि
  • हस्ताक्षर का सही मिलान ना होना
  • खाता बंद हो
  • तकनीकी त्रुटियां (जैसे- शब्दों में गलतियां, दोबारा लिखना आदि)
  • चेक की वैधता समाप्त हो चुकी है
  • फटा हुआ या क्षतिग्रस्त चेक

चेक बाउंस होने पर क्या होती है सजा या जुर्माना?

Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत यदि किसी व्यक्ति का चेक बैंक में अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो जाता है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाता है. इस स्थिति में अदालत दोषी व्यक्ति पर चेक की राशि के दोगुना तक जुर्माना लगा सकती है या अधिकतम दो वर्ष तक की कारावास की सजा दे सकती है. या दोनों दंड एक साथ भी दिए जा सकते हैं. इसके अलावा, संबंधित पक्ष चेक की राशि की वसूली के लिए अलग से दीवानी मुकदमा भी दायर कर सकता है, जिसमें आपराधिक सजा के बजाय केवल रकम की वसूली का उद्देश्य होता है.

चेक बाउंस होने पर बैंक के क्या हैं नियम?

बैंक आमतौर पर चेक बाउंस होने पर जारीकर्ता और भुगतान प्राप्तकर्ता दोनों से शुल्क लेते हैं, जो विभिन्न वित्तीय संस्थानों में अलग-अलग होता है. इसके अलावा, यदि मामला अदालत तक पहुंचता है तो कानूनी शुल्क भी लग सकता है. अगस्त 2021 में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक निर्देश जारी किया जिसमें कहा गया कि जो ग्राहक चेक पर बहुत अधिक निर्भर हैं या उनका उपयोग करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने बैंक खातों में न्यूनतम शेष राशि बनाए रखनी होगी. यदि आवश्यक न्यूनतम शेष राशि नहीं रखी जाती है, तो चेक बाउंस हो जाएगा। इसके अलावा, चेक जारी करने वाले पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

चेक बाउंस से बचने के लिए क्या करें?

  • पर्याप्त धनराशि रखें: खाते में उतनी राशि जरूर रखें, जितने के चेक जारी किए गए हैं.
  • लेन-देन पर नजर रखें: जारी किए गए चेक और खाते की बची हुई राशि की नियमित जांच करें.
  • ओवरड्राफ्ट सुविधा का उपयोग करें: जरूरत पड़ने पर बैंक की ओवरड्राफ्ट सेवा लें, ताकि धन की कमी न हो.
  • चेक का विवरण जांचें: चेक पर तारीख, राशि और हस्ताक्षर सही हैं या नहीं, यह दोबारा देख लें.
  • भुगतान प्राप्तकर्ता को सूचित करें: अगर भुगतान में देरी की संभावना हो, तो पहले ही जानकारी दे दें.
  • डिजिटल भुगतान अपनाएं: बड़े लेन-देन के लिए ऑनलाइन या डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करें.
  • अलर्ट सक्रिय करें: कम बैलेंस और चेक क्लियर होने की जानकारी के लिए SMS या ईमेल अलर्ट चालू रखें.
  • कर्मचारियों को जागरूक करें: यदि व्यवसाय है, तो चेक संभालने वाले लोगों को सही प्रक्रिया की जानकारी दें.
Kamesh Dwivedi

पिछले पांच वर्षों से डिजिटल मीडिया में बतौर लेखक अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले Zee News और Amar Ujala में कार्यरत रहे हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में BA और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय से MA की पढ़ाई की पूरी की. वायरल-ट्रेंडिंग कंटेंट के साथ बॉलीवुड, हॉलीवुड, भोजपुरी, साउथ सिनेमा के अलावा मनोरंजन की अन्य खबरों के लेखन और विश्लेषण में माहिर हैं. साथ ही कई सेलेब्स के इंटरव्यू भी कर चुके हैं. इसके अलावा क्रिकेट, राजनीति के साथ साहित्य का भी गहन अध्ययन करने का शौक है.

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