सरकार कर्मचारियों के फायदे के लिए एक योजना बना रही है. अगर सरकार जो सोच रही है, वो हो जाता है, तो कर्मचारियों की पेंशन और औसत वेतन पर काफी सर पड़ेगा. कर्मचारी इससे अपनी सेविंग्स बढ़ा सकते हैं.
EPFO Wage Ceiling Hike: वर्तमान समय में नियम है कि जिन कर्मचारियों का मूल वेतन 15000 रुपए तक है, उनके लिए ईपीएफ योजना में शामिल होना अनिवार्य है. इस वेतन राशि पर 12 फीसदी कर्मचारी और 12 फीसदी कंपनी योगदान देती है. हालांकि बीते 11 सालों में महंगाई और औसत वेतन में भारी बढ़त हुई है. इसको देखते हुए 15,000 रुपए की लिमिट अब पुरानी हो गई है. वहीं सरकार का मानना है कि अब 15000 रुपए की सीमा बढ़ाकर 25000 करने से लाखों नए कर्मचारी पीएफ के दायरे में आ जाएंगे.
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा कर्मचारियों की पेंशन पर पड़ने की संभावना है. इसकी वजह ये है कि वर्तमान समय में पेंशन की गणना 15000 रुपए की कैपिंग के आधार पर की जाती है. अगर ये सीमा 15000 रुपए से बढ़कर 25000 रुपए हो जाती है, तो कर्मचारियों के पेंशन खाते में हर महीने जमा होने वाली राशि बढ़ जाएगी. इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पंथली पेंशन की राशि बढ़ जाएगी. इसके बाद आपकी पीएफ राशि आपकी सैलरी के बड़े हिस्से पर कटेगी. इससे आपके पीएफ खाते में जमा होने वाले कुल फंड में भी तेजी से इजाफा होगा.
वहीं इस बदलाव के कारण आपकी इन हैंड सैलेरी में थोड़ी कटौती हो सकती है क्योंकि अब 15000 रुपए की बजाय 25000 रुपए की लिमिट पर 12 फीसदी पीएफ कटेगा. इससे कर्मचारी का हिस्सा बढ़ जाएगा. एक्सपर्ट्स की मानें, तो इससे भी कर्मचारियों का ही फायदा होगा. इसकी वजह ये है कि अगर कर्मचारी के वेतन से 12 पीसदी कटेगा तो साथ ही कंपनी भी अपना हिस्सा 12 फीसदी जमा करेगी, जिससे सेविंग्स का ग्राफ बढ़ेगा.
सरकार अभी इस प्रस्ताव के लिए हर पहलू पर विचार कर रही है. इस दौरान सरकार उद्योगों के पक्ष को भी ध्यान में रख रही है. वेतन सीमा बढ़ने से कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों के लिए ज्यादा पीएफ देना होगा. इससे कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर सरकार अपनी प्लानिंग की समीक्षा कर रही है. इससे मध्यम और लघु उद्योगों पर इसका कोई नेगेटिव असर न पड़े.
अगर सरकार इस नियम को लागू करती है, तो 11 साल बाद ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है. पिछली बार साल 2014 में सरकार ने ईपीएफ वेतन सीमा को 6500 रुपए से बढ़ाकर 15000 रुपए किया था. इसके बाद बीते 11 सालों में फिर से देश की अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव आए हैं. केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समितियां पहले ही इस बढ़त की सिफारिश की है और अब वित्त मंत्रालय की तरफ से इसकी मंजूरी के लिए इंतजार किया जा रहा है. अगर ये प्रस्ताव पास हो जाता है, तो इससे कर्मचारियों की सेविंग्स बढ़ेंगी. साथ ही सरकारी सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ेगा.
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