विदेशी निवेशकों ने 5 नवंबर को ₹14,975 करोड़ के शेयर खरीदे. सेंसेक्स 2,008 अंक उछला और निफ्टी 24,500 के पार पहुंचा.
Indian Stock Market: शेयर बाजार के लिए गुरुवार, 5 नवंबर का दिन काफी शानदार रहा. कई महीनों तक भारतीय शेयरों की लगातार बिकवाली करने वाले विदेशी निवेशकों ने अचानक बड़ा दांव लगाया. विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने एक ही दिन में करीब 14,975 करोड़ रुपये के शेयर खरीद डाले. यह एक साल से भी ज्यादा समय में विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी एक दिन की खरीदारी है. इस खरीदारी से बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने इसके उलट बिकवाली की और करीब 10,445 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए.
इसका मतलब है कि लंबे समय से विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को संभाल रहे घरेलू निवेशकों ने गुरुवार को मुनाफावसूली का रास्ता चुना. खास बात यह है कि विदेशी निवेशकों की खरीदारी अचानक नहीं हुई, बल्कि पूरे सप्ताह इसका रुझान दिखाई दे रहा था.
विदेशी निवेशकों की खरीदारी का सिलसिला सोमवार से ही शुरू हो गया था. सोमवार को FIIs ने 3,115 करोड़ रुपये, मंगलवार को 6,837 करोड़ रुपये और बुधवार को 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. इसके बाद गुरुवार को 14,975 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई. इस तरह चार कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने कुल 32,210 करोड़ रुपये भारतीय शेयर बाजार में लगाए.
इसका असर बाजार के प्रमुख इंडेक्स पर भी दिखाई दिया. गुरुवार को सेंसेक्स 2,008.61 अंक यानी 2.60 फीसदी की तेजी के साथ 79,310.01 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 50 में 2.40 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और यह 24,536.60 के स्तर पर पहुंच गया. खास बात यह रही कि निफ्टी ने अगस्त के बाद पहली बार 24,500 का स्तर पार करके कारोबार खत्म किया. पिछले छह कारोबारी सत्रों में इसमें 8 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ चुकी है.
गुरुवार की तेजी में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर का बड़ा योगदान रहा. निफ्टी बैंक इंडेक्स 3.3 फीसदी चढ़ गया, जबकि निफ्टी ऑटो में 4.1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. इन सेक्टरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार को मजबूती मिली.
अब सवाल है कि आखिर विदेशी निवेशकों का भरोसा अचानक भारतीय बाजार पर क्यों बढ़ा? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को माना जा रहा है.
बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 8.7 फीसदी गिरकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. गुरुवार को भी यह करीब 94 से 96 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा था. इसके साथ ही अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई थी. बाजार को उम्मीद है कि इससे पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम करने की संभावनाएं बन सकती हैं.
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होता है तो भारत का आयात बिल कम हो सकता है. इससे रुपये पर दबाव घटने और महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा जिन कंपनियों का खर्च पेट्रोल, डीजल और माल ढुलाई पर ज्यादा होता है, उन्हें भी राहत मिल सकती है. यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की एक और वजह अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट है. अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड मंगलवार को 4.95 फीसदी थी, जो बुधवार को घटकर 4.90 फीसदी पर आ गई. अक्टूबर की शुरुआत में यह 5.31 फीसदी तक पहुंच गई थी.
दरअसल, जब अमेरिका में बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न कम होता है तो वैश्विक निवेशक दूसरे देशों के शेयर बाजारों में बेहतर रिटर्न की तलाश करते हैं. भारत जैसे उभरते बाजारों को इससे फायदा मिल सकता है.
भारतीय कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे भी बाजार में तेजी की बड़ी वजह बने. कई बड़ी कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं. इससे निवेशकों को लगने लगा है कि भारतीय कंपनियों की कमाई में सुधार हो रहा है.
ब्रोकरेज फर्म नोमुरा के मुताबिक, कंपनियों की कमाई में सुधार और वैल्यूएशन का महामारी के बाद के औसत स्तर से नीचे होना भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक है. नोमुरा के अनुमान के अनुसार, 8 अक्टूबर के बाद से भारतीय शेयर बाजार डॉलर के लिहाज से करीब 6 फीसदी का रिटर्न दे चुका है.
इसके अलावा दुनिया भर में AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का फायदा भी भारतीय बाजार को मिला. ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के बाजारों में AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में पहले काफी तेजी आई थी. लेकिन अब कुछ निवेशक वहां से पैसा निकालकर दूसरे बाजारों में लगा रहे हैं. ऐसे में भारत उनके लिए निवेश का एक विकल्प बनकर उभरा है.
विदेशी निवेशकों को अगले बजट से भी कुछ उम्मीदें हैं. माना जा रहा है कि सरकार विदेशी निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत दे सकती है. हालांकि, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है.
विदेशी निवेशकों की वापसी निश्चित तौर पर भारतीय बाजार के लिए अच्छी खबर है, लेकिन इस तेजी को लेकर पूरी तरह निश्चिंत होना जल्दबाजी होगी. इसकी वजह यह है कि विदेशी निवेशक 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाल चुके हैं.
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, 5 नवंबर तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयरों से शुद्ध रूप से करीब 2.72 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं. पिछले 10 महीनों में से सात महीनों में वे बिकवाल रहे हैं. अकेले मार्च में करीब 1.18 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी.
ऐसे में गुरुवार की बड़ी खरीदारी से बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विदेशी निवेशक आने वाले दिनों में भी भारतीय शेयरों में पैसा लगाएंगे? अगर कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़ती हैं या कंपनियों की कमाई में सुधार रुक जाता है तो बाजार पर दोबारा दबाव बन सकता है.
फिलहाल सस्ता कच्चा तेल, कंपनियों के बेहतर नतीजे और वैश्विक बाजारों में बदलते निवेश रुझान ने विदेशी निवेशकों को भारत की ओर लौटने का मौका दिया है. अब आने वाले कारोबारी सत्र तय करेंगे कि यह वापसी लंबी चलेगी या फिर यह कुछ दिनों की तेजी बनकर रह जाएगी.
(डिस्क्लेमर: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है. इसे वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह न समझें। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले पाठकों को विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.)
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