गोल्ड और सिल्वर ETF में इन्वेस्ट करना आसान है लेकिन सही फंड चुनना बहुत जरूरी है. जानें कि सही ETF कैसे चुनें और आपको अपने पोर्टफोलियो का कितना हिस्सा इसमें इन्वेस्ट करना चाहिए.
सोने और चांदी की कीमतें
Gold-Silver ETF Investment: पिछले कुछ हफ्ते सोने और चांदी के लिए बहुत उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं. हालांकि, ईरान पर US और इजराइल के हमलों के बाद, इन्वेस्टर एक बार फिर सेफ जगहों की ओर रुख कर रहे हैं.
पहले लोग फिजिकल सोना या चांदी खरीदते थे. अब स्टोरेज और सिक्योरिटी की परेशानी के बिना गोल्ड और सिल्वर ETF के जरिए इन्वेस्ट करना आसान हो गया है. लेकिन इन्वेस्ट करने से पहले, यह समझना जरूरी है कि ETF क्या है और सही ETF कैसे चुनें.
गोल्ड ETF और सिल्वर ETF ऐसे फंड हैं जो सोने और चांदी की कीमत को ट्रैक करते हैं. इनकी यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदी और बेची जाती हैं, बिल्कुल स्टॉक की तरह. हर यूनिट के पीछे एक तय मात्रा में फिजिकल सोना या चांदी होता है.
इनमें निवेश करने के लिए एक डीमैट अकाउंट और एक ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है. बाजार के समय में कीमतें रियल टाइम में ऊपर-नीचे होती रहती हैं.
ETF की कीमतें ग्लोबल गोल्ड और सिल्वर लेटेंसी से जुड़ी होती हैं, इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में उतार-चढ़ाव पर नज़र रखना जरूरी है.
ETF चुनते समय सिर्फ़ हाल के रिटर्न को देखना सही तरीका नहीं है. मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) में ETF प्रोडक्ट हेड और फंड मैनेजर सिद्धार्थ श्रीवास्तव के अनुसार, इन्वेस्ट करते समय लिक्विडिटी और कम एक्सपेंस रेश्यो सबसे जरूरी बातें हैं. ट्रैकिंग एरर भी जरूरी है.
एक्सपेंस रेश्यो: यह फंड की मैनेजमेंट फीस है. एक्सपेंस रेश्यो जितना कम होगा, उतना अच्छा होगा, क्योंकि यह लंबे समय के रिटर्न पर असर डालता है.
ट्रैकिंग एरर: यह देखना ज़रूरी है कि ETF असल सोने या चांदी की कीमत को कितनी सही तरह से ट्रैक करता है. कम ट्रैकिंग एरर को बेहतर माना जाता है.
लिक्विडिटी: ETF का ट्रेडिंग वॉल्यूम अच्छा होना चाहिए. कम लिक्विडिटी से खरीदने और बेचने की कीमत में बड़ा अंतर आ सकता है.
एसेट्स अंडर मैनेजमेंट: ज्यादा AUM का मतलब है इन्वेस्टर का ज्यादा भरोसा और बेहतर लिक्विडिटी.
फंड हाउस की क्रेडिबिलिटी: किसी भरोसेमंद और जानी-मानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी से ETF चुनना ज़्यादा सुरक्षित है.
गोल्ड को आम तौर पर एक सेफ़-हेवन एसेट माना जाता है. मुश्किल समय में इसकी डिमांड बढ़ जाती है. सिल्वर की कीमतें भी इंडस्ट्रियल डिमांड से प्रभावित होती हैं, इसलिए उनमें ज्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है. अगर आप कम रिस्क ले सकते हैं, तो गोल्ड ETF ज्यादा सही हो सकता है. अगर आप ज्यादा उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो लिमिटेड एक्सपोजर वाले सिल्वर ETF के बारे में सोचें.
ज्यादातर फाइनेंशियल एडवाइजर आपके टोटल पोर्टफोलियो का 5 से 15 परसेंट सोना या चांदी जैसे एसेट्स में इन्वेस्ट करने की सलाह देते हैं, हालांकि यह आपकी उम्र, रिस्क लेने की क्षमता और इन्वेस्टमेंट गोल्स पर निर्भर करता है.
गोल्ड और सिल्वर ETF का मकसद जल्दी मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि आपके पोर्टफोलियो को बैलेंस करना है. जब स्टॉक मार्केट गिरता है, तो ये एसेट्स नुकसान कम करने में मदद कर सकते हैं, जैसा कि अभी हो रहा है. इसलिए, सिर्फ तेजी की भावना के कारण एक बार में बड़े इन्वेस्टमेंट न करें या गिरावट देखकर घबराकर बेच न दें.
अगर आप बिना किसी फिजिकल रिस्क के कीमती धातुओं में इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो गोल्ड और सिल्वर ETF एक आसान और ट्रांसपेरेंट ऑप्शन है. सही चुनाव और बैलेंस्ड इन्वेस्टमेंट के साथ, वे आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता दे सकते हैं.
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