इनकम टैक्स के पुराने नियम अब खत्म हुए. 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए नियम, जिनसे टैक्स भरना होगा आसान. जानें वो 10 बड़े बदलाव जो सीधे आपकी जेब पर असर डालेंगे.
पुराना टैक्स कानून खत्म! अब 8 शहरों में मिलेगा 50% HRA का बंपर फायदा, जानें वो 10 बदलाव जो आपकी जेब भर देंगे
CBDT ने शुक्रवार को आयकर नियम 2026 को नोटिफाई कर दिया है. यह नया ढांचा पिछले साल संसद द्वारा पारित किए गए सरल प्रत्यक्ष कर कानून को लागू करने के लिए लाया गया है. खास बात यह है कि ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे. इस बदलाव का सबसे बड़ा उद्देश्य टैक्स की उस पेचीदा भाषा को खत्म करना है जिसे समझना आम आदमी के लिए किसी पहेली से कम नहीं था. चलिए जानते हैं कि इस नए कानून में आपके लिए क्या खास है. और वह 10 बड़े बदलाव जो पुराने नियम में किये गए हैं.
पुराना कानून 1961 का था जिसकी भाषा इतनी उलझी हुई थी कि समझने के लिए वकील की जरूरत पड़ती थी. 2026 में लागू इस नियमों में किताबी ज्ञान कम और साफ/काम की बात ज्यादा है. 5.12 लाख शब्दों के भारी-भरकम बोझ को घटाकर आधा यानी 2.6 लाख शब्द कर दिया गया है.
अब तक सिर्फ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई को ही ‘मेट्रो सिटी’ मानकर 50% HRA छूट दी जाती थी. अब बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद के लोगों को भी बराबर का हक मिला है. इन 8 शहरों में अब आप अपनी सैलरी का 50% तक HRA क्लेम कर सकते हैं.
पुराने कानून में 819 धाराएं थीं जो किसी भूलभुलैया जैसी लगती थीं. नए नियमों में इन्हें घटाकर 536 कर दिया गया है. मतलब अब नियम कम होंगे और स्पष्टता ज्यादा होगी.
कानून की किताब में पहले 47 चैप्टर हुआ करते थे अब सिर्फ 23 चैप्टर बचे हैं. गैर-जरूरी और पुराने पड़ चुके नियमों को पूरी तरह हटा दिया गया है ताकि टैक्सपेयर कन्फ्यूज न हो.
टैक्स की लंबी-चौड़ी परिभाषाएं पढ़ने के बजाय अब 39 टेबल और 40 फॉर्मूले दिए गए हैं. यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी कठिन सवाल को हल करने के लिए एक सीधा शॉर्टकट मिल जाना. इससे कैलकुलेशन की गलतियां कम होंगी.
अब सिर्फ रेंट रसीद देना काफी नहीं होगा. नए नियमों के तहत आपको मकान मालिक और किराएदार के रिश्ते की जानकारी देनी होगी. यह पारदर्शिता लाने और फर्जी दावों को रोकने के लिए किया गया है.
अगर आप शेयर या डिबेंचर को कन्वर्ट करते हैं तो अक्सर लोग उलझ जाते थे कि समय कब से गिना जाए. अब नियम साफ है पुराने इंस्ट्रूमेंट को खरीदने के दिन से ही समय गिना जाएगा जिससे टैक्स का गणित आसान हो गया है.
अब चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है. अगर PAN कार्ड का डुप्लीकेशन होता है या टैक्स क्रेडिट में गड़बड़ मिलती है तो ऑडिटर्स को इसका जवाब देना होगा। इससे सिस्टम में ईमानदारी बढ़ेगी.
प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित करने के लिए 150 से ज्यादा नए आधिकारिक फॉर्म (फॉर्म संख्या 33 से शुरू) पेश किए गए हैं. हर काम के लिए अब एक तय और आसान फॉर्म होगा, ताकि कागजी कार्रवाई में वक्त बर्बाद न हो.
जो लोग विदेश से होने वाली कमाई पर टैक्स क्रेडिट का दावा करते हैं, उनके लिए नियम अब पहले से थोड़े कड़े और पारदर्शी हो गए हैं. दावों की जांच अब ज्यादा गहराई से की जाएगी.
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