Gold Investment: भारत में शादी हो या खुशी का कोई मौका सोना हर चीज में खरीदा जाता है, लेकिन क्या आप अंदाजा लगा सकते है कि आज से 25 साल बाद यानी 2025 में आप 1 करोड़ में कितना सोना खरीद सकते है.
2050 Gold Forecast Rates
साल 2000 में, 24 कैरेट सोने की कीमत 4,400 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि यही सोना अगले दो दशकों में 1 लाख रुपये का आंकड़ा पार कर जाएगा. अब अक्टूबर 2025 तक आते-आते, सोना 1.32 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया है यानी कीमतों में लगभग 30 गुना वृद्धि. इस दौरान, सोने ने निवेशकों को औसतन 14.6% का वार्षिक चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) दिया है। यह दर किसी भी पारंपरिक निवेश जैसे बैंक एफडी, पीपीएफ या सरकारी बॉन्ड से कहीं अधिक रही है.
पिछले दो दशकों में सोने की कीमतें कई कारणों से तेज़ी से बढ़ीं:
1. वैश्विक आर्थिक अस्थिरता: 2008 की मंदी, कोविड-19 महामारी, और हाल के भू-राजनीतिक तनावों (रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़रायल-हमास संघर्ष) ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प की तलाश में सोने की ओर मोड़ा।
2. डॉलर की कमजोरी: जब भी डॉलर कमज़ोर हुआ, सोना मज़बूत हुआ।
3. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: कई देशों के सेंट्रल बैंक लगातार सोना जमा कर रहे हैं, जिससे इसकी माँग बढ़ी है।
4. भारतीय परंपरा और त्योहार: भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर है। शादी-ब्याह, त्योहार और शुभ अवसरों पर सोना खरीदना परंपरा बन चुका है।
यानी, आज अगर आप 1 करोड़ रुपये का सोना खरीदते हैं, तो आपको एक छोटे बिस्किट जितना ही सोना मिलेगा लेकिन यही छोटा निवेश आने वाले वर्षों में बड़ी कीमत का हो सकता है.
अगर हम मान लें कि आने वाले 25 वर्षों (2025 से 2050) तक सोने की कीमतें 14.6% CAGR से बढ़ती रहीं, तो अनुमानित भविष्य की कीमत इस प्रकार होगी:
> भविष्य की कीमत = वर्तमान कीमत × (1 + CAGR)²⁵
= 1,32,000 × (1.146)²⁵ ≈ ₹40,00,000 प्रति 10 ग्राम
यानि 2050 में सोने की कीमत लगभग ₹4 लाख प्रति ग्राम तक पहुंच सकती है और उस समय, 1 करोड़ रुपये से केवल 25 ग्राम सोना ही खरीदा जा सकेगा.
हालांकि यह गणना तार्किक और ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित है, लेकिन यह पूर्ण सत्य नहीं है. सोने की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं जिसमें वैश्विक ब्याज दरें, डॉलर इंडेक्स की स्थिति, केंद्रीय बैंकों की नीतियां, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हालात और भारत की घरेलू मांग है. अगर मुद्रास्फीति तेज़ रही या वैश्विक संकट गहराया, तो सोने की कीमतें इससे भी ऊंचे स्तर पर जा सकती हैं. वहीं, अगर अर्थव्यवस्था स्थिर हुई और डॉलर मज़बूत रहा, तो कीमतें अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ेंगी.
वूमेंस प्रीमियर लीग 2026 (Women's Premier League 2026) का सातवां मुकाबला यूपी वॉरियर्स और दिल्ली…
डॉक्टरी के क्षेत्र में जाने की तैयारी करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है.…
US Supreme Court Tariff Decision: सबसे बड़ा और हैरान कर देने वाला मसला यह है…
Hussain Ustara Lady Don Sapna O Romeo Movie: हुसैन उस्तारा की बेटी सनोबर शेख ने…
भारत में सिंगर जुबीन गर्ग की मौत को लेकर हत्या के एंगल से जांच की…
भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में हार का सामना करना पड़ा. केएल राहुल…