ITR Filing Deadline 2026: पिछले हफ़्ते, 167वां इनकम टैक्स डे मनाया गया. यह इवेंट इसलिए खास था क्योंकि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के लागू होने के बाद यह पहला इनकम टैक्स डे था. इस इवेंट में, यूनियन फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने रिकॉर्ड संख्या में ITR फाइलिंग की तारीफ़ की.
आयकर विभाग ने टैक्सपेयर्स के लिए जारी किया अलर्ट
ITR Filing Deadline 2026: असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITRs) फाइल करने की डेडलाइन तेज़ी से पास आ रही है. अगर आपने अपना रिटर्न फाइलिंग अधूरा छोड़ दिया है, तो इसे बिना देर किए पूरा कर लें. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, अब तक 40 मिलियन से ज़्यादा टैक्सपेयर्स ने सफलतापूर्वक अपना रिटर्न फाइल कर दिया है. डिपार्टमेंट ने खास तौर पर सभी टैक्सपेयर्स से 31 जुलाई, 2026 की डेडलाइन का इंतज़ार न करने की अपील की है. आखिरी दिनों में ई-फाइलिंग पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण टेक्निकल दिक्कतों, सर्वर स्लोडाउन और बेवजह के स्ट्रेस से बचने के लिए, समय पर अपना रिटर्न फाइल करना समझदारी है.
ITR-1 या ITR-2 फॉर्म फाइल करना टैक्सपेयर्स के लिए एक ज़रूरी सालाना प्रोसेस है, जिसमें सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स और छोटे बिज़नेस शामिल हैं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक ऑफिशियल बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि 40 मिलियन ITR फाइलिंग का अहम माइलस्टोन पार कर लिया गया है. यह नंबर हर घंटे तेज़ी से बढ़ रहा है. डिपार्टमेंट का साफ़ मैसेज है कि डेडलाइन की वजह से होने वाली घबराहट से बचें और अपना काम पहले ही पूरा कर लें. तय डेडलाइन के अंदर अपना रिटर्न फाइल करने से न सिर्फ़ आप भारी पेनल्टी से बचेंगे, बल्कि यह भी पक्का होगा कि कोई भी TDS रिफंड आपके बैंक अकाउंट में तेज़ी से क्रेडिट हो जाए.
पिछले हफ़्ते, 167वां इनकम टैक्स डे मनाया गया. यह इवेंट इसलिए खास था क्योंकि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के लागू होने के बाद यह पहला इनकम टैक्स डे था. इस इवेंट में, यूनियन फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने रिकॉर्ड संख्या में ITR फाइलिंग की तारीफ़ की. उन्होंने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को रिफंड प्रोसेस को और तेज़ करने के साफ़ निर्देश दिए हैं. जल्दी रिफंड मिलने से टैक्सपेयर्स का सिस्टम पर भरोसा मज़बूत होता है और उनके लिए टैक्स नियमों का पालन करना आसान हो जाता है. “5R” प्रिंसिपल पर आधारित रिस्पॉन्सिव टैक्स गवर्नेंस का ज़िक्र करते हुए, फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि डिपार्टमेंट की ज़िम्मेदारी अब सिर्फ़ रेवेन्यू जेनरेट करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सिस्टम में फेयरनेस लाना, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस को बेहतर बनाना और नागरिक-केंद्रित सर्विस देना भी है.
इस बार टैक्स फाइलिंग का एक्सपीरियंस पहले से काफी बेहतर और आसान हो गया है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई-फाइलिंग पोर्टल की कंप्यूटिंग कैपेसिटी और बैंडविड्थ को काफी बढ़ा दिया है. इस अपग्रेड की वजह से, पोर्टल अब रोज़ाना 10 मिलियन से ज़्यादा टैक्सपेयर्स का ट्रैफिक आसानी से हैंडल कर रहा है. पीक पीरियड में, यह आंकड़ा 16 मिलियन इंटरैक्शन तक पहुंच गया था. डेटा से पता चलता है कि 21 जुलाई तक 32 मिलियन रिटर्न फाइल किए जा चुके थे. इनमें से 94 परसेंट सफलतापूर्वक वेरिफाई हो चुके थे, जबकि 60 परसेंट प्रोसेस हो चुके थे. इसका मतलब है कि आम आदमी के काम में अब बेवजह देरी नहीं हो रही है.
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्सपेयर के मुद्दों और शिकायतों को लेकर अपने अप्रोच में भी काफी बदलाव किया है. फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान, सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रिवांस रिड्रेसल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) पर मिली लगभग 78,000 शिकायतों में से 94 परसेंट का समाधान कर दिया गया है. पहले एक शिकायत को हल करने में औसतन 57 दिन लगते थे, लेकिन अब यह समय घटकर सिर्फ़ 28 दिन रह गया है. लगभग दो-तिहाई शिकायतें सिर्फ़ तीन हफ़्तों में हल हो गईं. इसके अलावा, ई-निवारण प्लेटफ़ॉर्म की परफ़ॉर्मेंस भी बेहतर हुई है. लगभग 3.5 लाख शिकायतों में से 95 प्रतिशत का समाधान हो गया है, और समाधान का औसत समय घटकर 42 दिन हो गया है.
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