Famous Shiva Temple Delhi: सावन 2026 में दिल्ली के 6 सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों के बारे में जानें. इन मंदिरों का धार्मिक महत्व, खासियत और दर्शन से जुड़ी पूरी जानकारी यहां पढ़ें.
दिल्ली के फेमस शिव मन्दिर
Famous Shiva Temple Delhi: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. अगर आप दिल्ली या उसके आसपास रहते हैं और इस सावन भोलेनाथ के दर्शन का मन बना रहे हैं, तो राजधानी के कुछ ऐसे प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं जहां हर साल लाखों भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. आइए जानते हैं दिल्ली के 6 प्रमुख शिव मंदिरों के बारे में.
पुरानी दिल्ली के बीचों-बीच स्थित श्री गौरी शंकर मंदिर राजधानी के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में गिना जाता है. माना जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग बेहद प्राचीन है. सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं. लाल किला मेट्रो स्टेशन से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है.
यमुना किनारे निगम बोध घाट के पास स्थित नीली छतरी शिव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी. सावन में यहां विशेष रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं.
महिपालपुर के पास स्थित यह मंदिर अपनी विशाल शिव प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है. करीब 100 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा दूर से ही श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है. शांत वातावरण और हरियाली के बीच स्थित यह मंदिर परिवार के साथ दर्शन के लिए भी बेहतरीन जगह माना जाता है.
पूर्वी दिल्ली के प्रीत विहार स्थित गुफा वाला शिव मंदिर सावन में आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. मंदिर की गुफानुमा बनावट इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है. सावन के पूरे महीने यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं.
दिल्ली के व्यस्त कनॉट प्लेस इलाके में स्थित यह शिव मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना माना जाता है. मान्यता है कि यहां का शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से यह मंदिर पैदल दूरी पर स्थित है, इसलिए यहां पहुंचना भी आसान है.
पश्चिमी दिल्ली के मादीपुर क्षेत्र में स्थित इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां भगवान शिव की पूजा की थी. सावन के दौरान यहां विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और जलाभिषेक का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.
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