RBI Action: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 150 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का 'सर्टिफिकेट ऑफ़ रजिस्ट्रेशन' (CoR) यानी पंजीकरण प्रमाण पत्र रद्द कर दिया है.
भारतीय रिजर्व बैंक ने 150 NBFC का पंजीकरण किया रद्द
RBI Action Against NBFC: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, जानकारी सामने आ रही है कि केंद्रीय बैंक ने तत्काल प्रभाव से पूरे देश में 150 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का ‘सर्टिफिकेट ऑफ़ रजिस्ट्रेशन’ (CoR) यानी पंजीकरण प्रमाण पत्र रद्द कर दिया है. असल में आरबीआई ने उन NBFCs के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई शुरू की है, जो नियमों का पालन करने में नाकाम रहीं.
आरबीआई द्वारा जारी की गई सूची से पता चलता है कि जिन 150 कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है. जिसके बारे में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह हा कि उनमें से ज्यादातर कंपनियां सिर्फ 2 राज्यों से काम कर रही थी.
मीडिया रिपोर्ट्स से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा पंजीकरण रद्द किए गए हैं; इस राज्य की लगभग 75 NBFCs का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है. इसके अलावा, दिल्ली में स्थित लगभग 67 कंपनियों का पंजीकरण समाप्त कर दिया गया है दिल्ली और पश्चिम बंगाल के अलावा, इस सूची में तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा की कंपनियां भी शामिल हैं.
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर आरबीआई ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आरबीआी ने यह कदम भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934′ की धारा 45-IA (6) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उठाया है. आम तौर पर रिजर्व बैंक ऐसी कार्रवाई तब करता है, जब कंपनियां तय वित्तीय मापदंडों (जैसे ‘न्यूनतम शुद्ध स्वामित्व निधि’ या Minimum Net Owned Funds), नियमों और नियामक दिशानिर्देशों का पालन करने में नाकाम रहती हैं; या जब यह पाया जाता है कि वे लंबे समय से निष्क्रिय (dormant) पड़ी हैं. जिन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है, वे ऋण देने, लीज़िंग, निवेश और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थीं.
आरबीआई के नियमों के अनुसार, पंजीकरण रद्द होने के बाद इन 150 कंपनियों को अब ‘RBI अधिनियम, 1934’ की धारा 45-I, खंड (a) के तहत किसी भी रूप में ‘नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन’ (NBFI) के तौर पर कारोबार करने से रोक दिया गया है. ये कंपनियां अब आम जनता या बाज़ार से नए जमा (deposits) स्वीकार नहीं कर सकतीं और न ही किसी भी तरह के ऋण या वित्तीय सेवाएं दे सकती हैं.
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि NBFC क्या होता है. तो चलिए आपको इसके बारे में आसान भाषा में समझाते हैं. नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) ऐसे वित्तीय संस्थान हैं, जो ठीक वाणिज्यिक बैंकों की तरह ही ऋण देने, शेयरों और बॉन्ड में निवेश करने और अन्य विभिन्न वित्तीय सेवाएं प्रदान करने जैसी गतिविधियों में शामिल होती हैं. हालांकि, उनके पास पारंपरिक बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता है और न ही वे पारंपरिक बैंकों की तरह डिमांड डिपॉज़िट (बचत या चालू खाते) स्वीकार कर सकते हैं. वे पूरी तरह से RBI द्वारा विनियमित और नियंत्रित होते हैं.
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