भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने डिजिटल फ्रॉड के पीड़ितों के लिए ₹25,000 तक के मुआवज़े की घोषणा की है. यह मुआवज़ा उन मामलों में भी मिलेगा जहां गलती से वन-टाइम पासवर्ड (OTP) शेयर हो गया था.
आरबीआई डिजिटल धोखाधड़ी नियम
RBI Digital Fraud: अगर आप गलती से अपना वन-टाइम पासवर्ड (OTP) शेयर कर देते हैं और आपके अकाउंट से पैसे कट जाते हैं, तो अब आपको पूरा नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा. डिजिटल फ्रॉड बढ़ने के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बड़ा ऐलान किया है. RBI ने कहा है कि ऐसे मामलों में कस्टमर्स को ₹25,000 तक का मुआवज़ा दिया जाएगा.
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ तौर पर कहा कि यह राहत उन मामलों में भी मिलेगी जहां कस्टमर ने गलती से धोखेबाज़ के साथ OTP शेयर कर दिया था. इसका मतलब है कि अगर ट्रांजैक्शन अनजाने में हुआ था और कस्टमर का फ्रॉड करने का कोई इरादा नहीं था, तो मुआवजा “बिना ज़्यादा सवाल-जवाब के” दिया जाएगा.
यह पैसा बैंकों से नहीं, बल्कि डिपॉज़िटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड से आएगा. इस फंड में ऐसे अनक्लेम्ड डिपॉज़िट शामिल हैं जो 10 साल से ज़्यादा समय से इस्तेमाल नहीं हुए हैं.
RBI अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल फ्रॉड के दो-तिहाई मामलों में रकम ₹50,000 से कम होती है, इसलिए ज़्यादातर पीड़ितों को इस स्कीम से राहत मिल पाएगी. हालांकि, कुछ शर्तें भी हैं.
1. ग्राहक को यह मुआवज़ा ज़िंदगी में सिर्फ़ एक बार मिलेगा.
2. धोखाधड़ी में कोई गलत इरादा शामिल नहीं होना चाहिए.
3. अगर धोखाधड़ी की रकम ₹25,000 से कम भी है, तो भी ग्राहक को धोखाधड़ी की रकम का 15% खुद देना होगा.
4. बड़े धोखाधड़ी के मामलों में भी, मुआवज़ा ज़्यादा से ज़्यादा ₹25,000 तक ही सीमित रहेगा.
डिप्टी गवर्नर स्वामिनाथन जे. ने कहा कि इसका मकसद उन लोगों को बचाना है जो अनजाने में फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, ताकि उन पर फाइनेंशियल बोझ ज़्यादा न पड़े. RBI ने यह भी संकेत दिया है कि और भी सुरक्षा उपाय शुरू किए जाएंगे, जैसे डिजिटल ट्रांजैक्शन को क्रेडिट करने में जानबूझकर थोड़ी देरी और सीनियर सिटीजन के लिए एक्स्ट्रा ऑथेंटिकेशन.
इस मुआवज़े के फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट जल्द ही पब्लिक की राय के लिए जारी किया जाएगा. इसका मतलब है कि अब डिजिटल फ्रॉड के दौर में ग्राहकों के पास एक सेफ्टी नेट होगा.
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