ग्लोबल मार्केट में कीमती मेटल की कीमतें लगातार ऊंची हैं. इस उछाल का सीधा असर भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व पर पड़ा है. पिछले छह महीनों में, भारत के कुल फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व में सोने का हिस्सा 13.92 परसेंट से बढ़कर 16.7 परसेंट हो गया है.
भारत वापस आया RBI का 104 टन सोना
Rbi Gold: रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए विदेशों में जमा 104.23 मीट्रिक टन सोना वापस लाया है. इस बड़े कंसाइनमेंट को मार्च 2026 तक खत्म होने वाले छह महीनों के दौरान सुरक्षित रूप से देश के वॉल्ट में पहुंचाया गया. आम लोगों के लिए यह सोचना स्वाभाविक है: देश में इतना सोना आने से क्या बुलियन मार्केट में सोने की कीमत गिर जाएगी? क्या अब इन्वेस्टमेंट या शादियों के लिए ज्वेलरी खरीदना सस्ता हो जाएगा?
सेंट्रल बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान भारत के कुल गोल्ड रिज़र्व में मामूली बढ़ोतरी हुई है. सितंबर 2025 में यह आंकड़ा मार्च 2026 तक बढ़कर 880.52 मीट्रिक टन हो गया. असली बदलाव सोने की कुल क्वांटिटी में नहीं, बल्कि उसके एड्रेस में है. मार्च 2026 तक, देश में रखे सोने की क्वांटिटी 290.37 मीट्रिक टन दर्ज की गई थी. इससे पहले, सितंबर 2025 में यह 575.82 मीट्रिक टन और मार्च 2025 में 511.99 मीट्रिक टन था.
यह दिलचस्प है कि RBI अपना सारा सोना देश में नहीं रखता है. मार्च 2026 तक, 197.67 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ़ इंग्लैंड और बैंक फ़ॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) की सेफ़ कस्टडी में था. इसके अलावा, 2.80 मीट्रिक टन सोना विदेशी वॉल्ट में “गोल्ड डिपॉज़िट” के तौर पर रखा गया था. यह एक मज़बूत इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी से चलता है. इंटरनेशनल लेवल पर सोना स्टोर करने से लिक्विडिटी या कैश फ़्लो पक्का होता है. ग्लोबल मार्केट में गोल्ड ट्रेडिंग एक्टिव रहती है, जिससे किसी संकट के समय इस सोने को विदेश में गिरवी रखकर तेज़ी से डॉलर जुटाना आसान हो जाता है. साथ ही, एक बड़ा हिस्सा देश में वापस लाने से स्ट्रैटेजिक कंट्रोल मज़बूत होता है और सिस्टम में भरोसा बढ़ता है.
ग्लोबल मार्केट में कीमती मेटल की कीमतें लगातार ऊंची हैं. इस उछाल का सीधा असर भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व पर पड़ा है. पिछले छह महीनों में, भारत के कुल फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व में सोने का हिस्सा 13.92 परसेंट से बढ़कर 16.7 परसेंट हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल फॉरेन एक्सचेंज एसेट्स $552.28 बिलियन, यानी $465.61 बिलियन का एक बड़ा हिस्सा फॉरेन सिक्योरिटीज़ में इन्वेस्टेड है. इसके अलावा, $46.83 बिलियन दूसरे सेंट्रल बैंकों और बैंक ऑफ़ इंडिया के पास हैं, जबकि $39.84 बिलियन फॉरेन कमर्शियल बैंकों के पास हैं. इस बार, इन्वेस्टमेंट पैटर्न में थोड़ा बदलाव देखा गया है, सिक्योरिटीज़ और फॉरेन बैंकों में डिपॉज़िट थोड़ा कम हुआ है और दूसरे सेंट्रल बैंकों में डिपॉज़िट बढ़ा है. इसके साथ ही, RBI के नेट फॉरवर्ड एसेट्स (पेएबल) मार्च 2026 तक $103.06 बिलियन तक पहुँच गए हैं, जो मज़बूत फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट को दिखाता है.
क्या इस बड़े कदम से सोने की कीमतों में कमी आएगी? इसका सीधा जवाब है नहीं. यह कदम पूरी तरह से RBI का एक स्ट्रेटेजिक और लॉजिस्टिक फैसला है. मार्केट में सोने की कीमतें मुख्य रूप से इंटरनेशनल हालात, US डॉलर की चाल, इंटरेस्ट रेट, महंगाई, जियोपॉलिटिकल टेंशन, साथ ही ग्लोबल डिमांड और सप्लाई से तय होती हैं. इस पूरी प्रोसेस के दौरान रिज़र्व बैंक ने मार्केट में न तो कोई नया सोना बेचा है और न ही खरीदा है. यह सिर्फ़ एक जगह से दूसरी जगह फिजिकल ट्रांसफर है. इसलिए, इसका आम आदमी के लिए बुलियन मार्केट की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
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