Dashrath Singh Success Story: झुंझुनू के किसान परिवार से आने वाले पूर्व सैनिक दशरथ सिंह ने अपने मजबूत इरादों और मेहनत से ऐसी उपलब्धि हासिल की, जो युवाओं के लिए सच्ची प्रेरणा बन गई है.
Dashrath Singh ने कमाल कर दिया है.
Dashrath Singh Success Story: अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता. ऐसी ही कहानी दशरथ सिंह की है, जिन्होंने हर उस व्यक्ति को प्रेरित करती है जो अपने सपनों को सच करना चाहता है. राजस्थान के झुंझुनू जिले के निवासी दशरथ सिंह आज युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं. एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस पूर्व सैनिक ने अपने जुनून और मेहनत से वह उपलब्धि हासिल की, जो किसी के लिए भी प्रेरणादायक है.
उन्होंने अब तक 138 डिग्रियां, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट प्राप्त किए हैं, जो उनकी शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी सीखना नहीं छोड़ा. हाल ही में IGNOU के दीक्षांत समारोह में उन्हें उनकी नवीनतम उपलब्धि वैदिक अध्ययन में मास्टर डिग्री के लिए सम्मानित किया गया. खास बात यह है कि उन्होंने यह डिग्री डिस्टिंक्शन के साथ पूरी की.
55 वर्षीय दशरथ सिंह का सफर आसान नहीं था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई एक छोटे से गांव के सरकारी स्कूल से की. आर्थिक तंगी के कारण आगे की पढ़ाई एक सपना लगती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. वर्ष1988 में उन्होंने भारतीय सेना जॉइन की और करीब 16 साल तक पंजाब, जम्मू-कश्मीर सहित कई क्षेत्रों में सेवा दी. वर्ष 2004 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने अधूरे सपने को पूरा करने का फैसला किया.
सेना में रहते हुए भी उनका मन पढ़ाई में लगा रहता था. सालाना छुट्टियों का उपयोग वे पढ़ाई के लिए करते थे. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ शिक्षा को अपना लक्ष्य बना लिया. उन्होंने बैचलर ऑफ कॉमर्स, LLB, LLM, BJMC और B.Ed जैसी डिग्रियां रेगुलर छात्र के रूप में हासिल कीं. इसके अलावा उन्होंने IGNOU, जैन विश्व भारती संस्थान और अन्य विश्वविद्यालयों से कई कोर्स पूरे किए.
अब तक दशरथ सिंह तीन PhD, सात ग्रेजुएशन डिग्रियां, 46 पोस्टग्रेजुएशन डिग्रियां, 23 डिप्लोमा और 52 सर्टिफिकेट हासिल कर चुके हैं. इसके अलावा सैन्य अध्ययन से जुड़ी सात विशेष डिग्रियां भी उनके नाम हैं. वे दावा करते हैं कि उन्होंने 11 विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं, जिन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और अन्य संस्थाओं द्वारा मान्यता मिली है। हालांकि इन रिकॉर्ड्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं की, बल्कि समाज सेवा की दिशा में भी कदम बढ़ाया. कानून की डिग्री हासिल कर उन्होंने वकालत शुरू की और सेना की ‘सप्त शक्ति कमांड’ में लीगल एडवाइज़र के रूप में काम किया. दशरथ सिंह की कहानी यह साबित करती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. अगर आपके अंदर कुछ करने का जुनून है, तो सीमित संसाधन भी आपको रोक नहीं सकते.
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