आईआईटी (IIT) में बायोटेक्नोलॉजी,(Biotechnology) माइनिंग और टेक्सटाइल (Mining and Textile) जैसे क्षेत्रों का कटऑफ (Cut-Off) सबसे कम देखने को मिलता है, जहां उम्मीदवार (Candidates) ज्यादातर आईआईटी टैग के लिए इन्हें चुनते हैं.
क्या इंजीनियरिंग में सबसे निचली कटऑफ वाली ब्रांच आपके लिए है सही?
Engineering and lowest cutoff: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में दाखिला लेने के लिए छात्रों को न सिर्फ कड़ी मेहनत करना पड़ता है बल्कि देश की सबसे कठिन परीक्षा से गुज़रना होता है. (IIT) में प्रवेश पाना हर इंजीनियरिंग छात्र का एक सबसे बड़े सपने में से एक होता है. तो वहीं, ज्यादातर छात्र इस सोच में रहते हैं कि ब्रांच का कटऑफ सबसे कम जाता है ताकि वे आईआईटी का टैग हासिल कर सकें. लेकिन, हकीकत यह है कि बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology), एग्रीकल्चरल एंड फूड इंजीनियरिंग (Agricultural and Food Engineering), और माइनिंग इंजीनियरिंग (Mining Engineering) जैसे विषय का कटऑफ सबसे कम देखने को मिलता है.
जानकारी के मुताबिक, आईआईटी में ब्रांच का ज्यादातर चयन पॉपुलरिटी और प्लेसमेंट पैकेज के आधार पर ही किया जाता है. तो वहीं, कंप्यूटर साइंस (CSE) की सीटें कुछ सौ रैंक के अंदर तक सबसे तेजी से भर जाती है. तो वहीं, बायोटेक्नोलॉजी (Biotechnology) और एप्लाइड जियोलॉजी (Applied Geology) में आईआईटी मद्रास, खड़गपुर और रुड़की जैसे पुराने संस्थानों में भी इन विषय की रैंकी काफी ज्यादा पीछे चलती है.
तो वहीं, दूसरी तरफ मेटालर्जिकल और टेक्सटाइल इंजीनियरिंग (Metallurgical and Textile Engineering) के लिए आईआईटी दिल्ली में टेक्सटाइल और आईआईटी बॉम्बे में मेटालर्जी ज्यादातर छात्रों की पसंद तेजी से बनता जा रहा है. इसके अलावा कम कटऑफ वाली ब्रांच लेने वाले लगभग 60 से 70 प्रतिशत के ज्यादातर छात्र कोडिंग, डेटा एनालिटिक्स जैसे विषयों में अपना करियर बनाने का सपना देखते हैं.
अगर आप सिर्फ और सिर्फ आईआईटी के टैग के लिए माइनिंग या टेक्सटाइल चुन रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखना रखना सबसे ज्यादा जरूरत है कि आपको 4 सालों से वहीं विषय पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करना होगा नहीं तो आपकी एकेडमिक परफॉरमेंस (CGPA) बुरी तरह से गिर भी सकती है. इतना ही नहीं, अन्य कंपनियों में इन ब्रांच के लिए पैकेज कंप्यूटर साइंस के मुकाबले कम होते हैं.
हालांकि, सबसे कम कटऑफ वाली ब्रांच आईआईटी में एंट्री का एक ‘शॉर्टकट’ रास्ता तो ज़रूर हो सकती है. लेकिन यह सफलता की गारंटी पर पूरी तरह से आधारित नहीं होती है.
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