IIT से निकलने वाले छात्र बड़े सपने और इनोवेशन की उम्मीद लेकर आगे बढ़ते हैं. लेकिन कॉलेज के बाद की ज़िंदगी हमेशा उम्मीदों जैसी नहीं होती.
Life after IIT: भारत में इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी (IITs) को देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में गिना जाता है. यहां से निकलने वाले छात्रों को अक्सर देश के सबसे प्रतिभाशाली और होनहार युवा प्रोफेशनल्स माना जाता है. इन छात्रों के पास बड़े सपने होते हैं नए आइडियाज़ पर काम करना, इनोवेशन करना और दुनिया में कुछ बड़ा हासिल करना.
लेकिन हर कहानी उम्मीद के मुताबिक नहीं होती. हाल ही में Reddit पर एक IIT ग्रेजुएट की पोस्ट ने इस सच्चाई को सामने रखा कि कॉलेज के बाद की ज़िंदगी कई बार उम्मीदों से बिल्कुल अलग हो सकती है.
पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि उन्होंने पिछले साल एक टियर-1 IIT से ग्रेजुएशन पूरी की और कैंपस प्लेसमेंट के जरिए बेंगलुरु में एक अच्छी सैलरी वाली नौकरी हासिल कर ली. शुरुआत में यह सब एक शानदार भविष्य की शुरुआत जैसा लग रहा था. लेकिन असल ज़िंदगी उतनी रोमांचक नहीं निकली जितनी उन्होंने सोची थी. इंजीनियर के अनुसार, अब रोज़ का काम बेहद “बोरिंग और नीरस” लगता है. कॉलेज के दिनों में जहां क्रिएटिविटी, एक्सपेरिमेंट और नए आइडियाज़ पर काम करने का माहौल था, वहीं अब ज़िंदगी एक रूटीन में बदल गई है.
उन्होंने लिखा कि कॉलेज में लगता था कि मैं कुछ भी बन सकता हूं. आसमान ही सीमा थी. मैं चीज़ें सिर्फ इसलिए बनाता था क्योंकि मुझे उससे प्यार था.
कॉलेज खत्म होने के बाद ज़िंदगी की प्राथमिकताएं भी बदल गईं. इंजीनियर ने बताया कि अब उनके दिन का बड़ा हिस्सा बेंगलुरु के व्यस्त आउटर रिंग रोड के ट्रैफिक में ऑफिस आने-जाने में निकल जाता है. वहीं, जो दोस्त कभी कैंपस में साथ घंटों बिताते थे, वे अब अपनी-अपनी नौकरियों और जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं. इससे नए आइडियाज़ पर मिलकर काम करने के मौके भी कम हो गए हैं.
उन्होंने लिखा कि हां, मेरे पास अच्छी सैलरी वाली नौकरी है, लेकिन यह बोरिंग है. आखिर कोई अपनी नौकरी से कितना प्यार कर सकता है?

इंजीनियर का कहना है कि वे चाहते हैं कि उनकी स्किल्स का इस्तेमाल किसी बड़े और अर्थपूर्ण काम में हो. ऐसा प्रोजेक्ट जिसमें कुछ नया बनाने की संभावना हो और जो उन्हें अज्ञात चीज़ों के रोमांच से भर दे. उनके अनुसार, वे किसी ऐसे काम का हिस्सा बनना चाहते हैं जिसमें भविष्य में कुछ बड़ा बनने की क्षमता हो.
पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. एक यूज़र ने लिखा कि हर स्टूडेंट को स्कूल और कॉलेज के दिन एन्जॉय करने चाहिए, क्योंकि बाद में ऐसा मज़ा शायद ही मिले. एक अन्य यूज़र ने कहा कि चार शानदार कॉलेज वर्षों के बाद कॉर्पोरेट लाइफ में एडजस्ट करना उनके लिए भी उतना ही मुश्किल रहा.
वहीं, एक यूज़र ने अलग नजरिया पेश करते हुए लिखा कि बोर होना भी एक तरह की प्रिविलेज है, जो बहुत कम लोगों को मिलती है. शायद अभी इसका एहसास न हो, लेकिन समय के साथ यह समझ में आ जाएगा. यह कहानी दिखाती है कि कॉलेज से प्रोफेशनल लाइफ में बदलाव सिर्फ करियर का नहीं, बल्कि सोच और उम्मीदों का भी होता है.
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