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spiderman movie review: ‘नो वे होम’ के शोर के बाद लौटा असली पीटर पार्कर! जानिए कैसी है ‘Spider-Man: Brand New Day’

Spider-Man Brand New Day Review: टॉम हॉलैंड की नई स्पाइडर-मैन फिल्म में एक्शन से ज्यादा जज्बातों का जादू. जानें कैसी है यह भावनात्मक और रोमांचक कहानी.

spiderman movie review: एक ऐसे सुपरहीरो के लिए जो महज़ कुछ सेकेंडों में पूरे मैनहैटन के इस पार से उस पार झूल सकता है, पीटर पार्कर ने हमेशा इस दुनिया का भावनात्मक बोझ एक बेहद आम इंसान की तरह अपने कंधों पर उठाया है. शायद यही बात हमारे आपके “फ्रेंडली नेबरहुड स्पाइडर-मैन” को बाकी नकाबपोश सुपरहीरोज़ से अलग बनाती है. वह कोई अरबपति जीनियस नहीं है, न ही किसी दूसरे लोक का देवता या कोई सुपर सोल्जर. वह तो बस एक आम सा लड़का है जो हमेशा सही काम करने की कोशिश करता है, भले ही इसके लिए उसे अपनी हर चीज़ की कुर्बानी क्यों न देनी पड़े.

Spider-Man: Brand New Day इस बात को हालिया किसी भी सुपरहीरो फिल्म से बेहतर समझती है, और अच्छी बात यह है कि इसे बनाने वाले भी इस भावना को बखूबी समझते हैं. Spider-Man: No Way Home के मल्टीवर्स वाले पागलपन के बाद, Brand New Day समझदारी दिखाते हुए ब्रह्मांड को तबाह करने वाली अफ़रा-तफ़री को छोड़कर एक बेहद निजी और भावनात्मक कहानी की तरफ लौटती है. फिल्म में खतरा भले ही अब भी बड़ा हो, लेकिन इस बार इसकी शुरुआत एक नन्हे से अपार्टमेंट में अकेले बैठे उस लड़के से होती है, जो यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या स्पाइडर-मैन बनने के लिए पीटर पार्कर की ज़िंदगी को दांव पर लगाना सही है? एक ऐसी फ्रेंचाइजी के लिए यह एक बहुत ही ताज़ा और सुकून देने वाला बदलाव है, जो चाहती तो बड़े जज्बातों की जगह सिर्फ बड़े धमाकों के पीछे भाग सकती थी.

डायरेक्टर डेस्टिन डैनियल क्रेटन ने फिल्म को ठीक वही दिया है जिसकी इसे सबसे ज्यादा ज़रूरत थी—एक संवेदनशील दिल. हां, फिल्म में कमाल के एक्शन सीन्स हैं, हवा में उड़ते हुए वेब-स्विंगिंग के मोमेंट्स हैं और बहुत ही इनोवेटिव फाइट्स हैं जो स्पाइडर-मैन की फुर्ती का पूरा फायदा उठाती हैं. लेकिन जो बात सीधे दिल में उतरती है, वह तब होती है जब मुंह से मास्क हटता है. जब पीटर गगनचुंबी इमारतों के बीच उड़ नहीं रहा होता, तब भी आप उससे जुड़े रहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी सबसे बड़ी लड़ाई हमेशा विलेन से नहीं होती. कभी-कभी उसकी असली जंग अपने अंदर के अपराधबोध, अकेलेपन और अपने ही फैसलों के नतीजों से होती है, जिन्हें वह कभी बदल नहीं सकता.

टॉम हॉलैंड ने पीटर पार्कर के रूप में शायद अपनी अब तक की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है. वह झिझकने वाला और अटपटा सा टीनेजर अब पीछे छूट चुका है जिसे दर्शकों ने सालों पहले देखा था. यह वाला पीटर उम्र में थोड़ा बड़ा है, शांत है और अंदर से थका हुआ नज़र आता है. हॉलैंड ने इस उदासी को बहुत ज्यादा ड्रामेटिक नहीं बनाया है. इसके बजाय, वे इसे अपनी हर मुस्कान और हर मज़ाक के पीछे धीरे-धीरे सुलगने देते हैं. उनकी कॉमिक टाइमिंग आज भी बेमिसाल है, लेकिन उनके मज़ाकों के पीछे एक ऐसी थकान छिपी है जो स्पाइडर-मैन के इस रूप को पहले से कहीं ज्यादा असल और वास्तविक बनाती है. उसके स्पाइडी-सेंस भले ही आज भी बहुत तेज़ हों, लेकिन भावनात्मक रूप से पीटर लगातार खुद पर शक करता रहता है, जो उसे हम जैसे आम इंसानों के और भी करीब ले आता है.

ज़ेंडया की एमजे (MJ) एक बार फिर साबित करती हैं कि वे इस फ्रेंचाइजी की सबसे मजबूत भावनात्मक नींव क्यों हैं. दोनों की केमिस्ट्री एकदम सहज लगती है, जहां कई बार उनकी हल्की-फुल्की बातचीत किसी भी सुपरहीरो की ढिशुम-ढिशुम से ज्यादा असर छोड़ जाती है. फिल्म के कुछ सबसे खूबसूरत और गहरे पल घूंसे चलाने या पोर्टल खोलने से नहीं, बल्कि खामोशी, एक-दूसरे को निहारने और बिना कहे रह गए शब्दों से पैदा होते हैं.

जैकब बैटलन ‘नेड’ के रोल में वापस लौटे हैं. हालांकि दिल चाहता है कि उन्हें थोड़ा और स्क्रीन टाइम मिलता, लेकिन वे बहुत आसानी से ग्रुप की उसी पुरानी लय में ढल जाते हैं. इन दोस्तों की बॉन्डिंग इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है, जो दर्शकों को याद दिलाती है कि पीटर पार्कर सूट के अंदर जितना खास है, सूट के बाहर भी उतना ही दिलचस्प इंसान है.

नए चेहरे भी कहानी में बहुत अच्छी तरह फिट होते हैं. साडी सिंक अपने किरदार में रहस्य और जज्बातों की गहराई लेकर आती हैं, जिससे उनका रोल सिर्फ स्पाइडर-मैन के दुश्मनों की लिस्ट में एक और नाम जोड़ने तक सीमित नहीं रहता. जॉन बर्न्थल का फ्रैंक कैसल (द पनिशर) जब भी स्क्रीन पर आता है, अपने साथ एक रफ-एंड-टफ एनर्जी लेकर आता है. स्पाइडर-मैन के पक्के नैतिक उसूलों को फ्रैंक के बेरहम और सख्त नज़रिए से टकराते देखना फिल्म के सबसे मजेदार सीन्स गढ़ता है.

Brand New Day की सबसे बड़ी जीत यह है कि इसे याद है कि स्पाइडर-मैन को शानदार लगने के लिए मल्टीवर्स के सहारे की ज़रूरत नहीं है. अपने पिछले पार्ट से आगे निकलने की अंधी दौड़ के बजाय, यह फिल्म पीटर पार्कर को बिल्कुल शुरुआत से दोबारा गढ़ने पर ध्यान देती है. एक्शन में रफ्तार है लेकिन वह थकाऊ नहीं लगता. कई सीन्स में कंप्यूटर ग्राफिक्स (VFX) के साथ-साथ असली स्टंट्स का बहुत ही समझदारी से इस्तेमाल किया गया है. स्पाइडर-मैन को एक बार फिर न्यूयॉर्क की गलियों में झूलते देखना उस जादू और उत्सुकता को वापस ले आता है, जो हाल की सुपरहीरो फिल्मों में कहीं खो सा गया था. वेब-स्लिंगिंग देखकर रोमांच भर जाता है, एक्शन कोरियोग्राफी बहुत ही नई लगती है, और हां, कुछ पल ऐसे भी आते हैं जहां आपका अपना ‘स्पाइडी टिंगल’ जाग उठेगा.

ऐसा नहीं है कि फिल्म में कोई कमी नहीं है. दो घंटे से थोड़े ज्यादा के रनटाइम में कुछ हिस्से और सुव्यवस्थित (टाइट) हो सकते थे. अगर आप हाल की सुपरहीरो कहानियां देख रहे हैं, तो कुछ मोड़ थोड़े जाने-पहचाने से लग सकते हैं. कुछ इमोशनल सीन्स भी ऐसे हैं जिनका अंदाजा उनके आने से काफी पहले ही लग जाता है. लेकिन एक ऐसी फिल्म में जो अपने जज्बाती केंद्र को कभी नहीं भूलती, ये बहुत छोटी-मोटी कमियां हैं.

सबसे अहम बात यह है कि Spider-Man: Brand New Day समझती है कि स्पाइडर-मैन पीढ़ियों से लोगों के दिलों में क्यों बसा हुआ है. यह सिर्फ शहर बचाने के बारे में नहीं है. यह उन अनजान लोगों के लिए अपनी निजी खुशियां कुर्बान करने के बारे में है जो शायद कभी आपका नाम तक नहीं जानेंगे. यह तब भी उम्मीद का दामन थामे रखने के बारे में है जब ज़िंदगी आपको बार-बार नीचे गिराती है. यह गिरकर दोबारा उठने, चेहरे पर मास्क लगाने और एक नए दिन की तरफ दोबारा झूल जाने के बारे में है.

और जब क्रेडिट्स रोल होते हैं, तो एक सवाल बाकी सब चीज़ों की तरह दिल में तैरता रह जाता है: क्या स्पाइडर-मैन को आखिरकार उसकी “मिसेज स्पाइडर-मैन” मिलेगी? खैर… IYKYK (अगर आप जानते हैं, तो आप जानते हैं). या शायद यह कहानी किसी और “ब्रैंड न्यू डे” के लिए है.

Shivani Singh

नमस्ते, मैं हूँ शिवानी सिंह. पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के सफर में हूं और वर्तमान में 'इंडिया न्यूज़' में सब-एडिटर के तौर पर अपनी भूमिका निभा रही हूं. मेरा मानना है कि हर खबर के पीछे एक कहानी होती है और उसे सही ढंग से कहना ही एक पत्रकार की असली जीत है. chakdecricket, Bihari News, 'InKhabar' जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में सब-एडिटर और एंकर की भूमिका निभाने के बाद, अब मैं अपनी लेखनी के जरिए आप तक पॉलिटिक्स, क्रिकेट और बॉलीवुड की बड़ी खबरों को डिकोड करती हूं. मेरा उद्देश्य जटिल से जटिल मुद्दे को भी सहज और सरल भाषा में आप तक पहुंचाना है.

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