Jharkhand Crime News: झारखंड के हजारीबाग में 28 करोड़ रुपये के ट्रेजरी घोटाले में सिपाही का मास्टर माइंड पाया गया है. कहा जा रहा है कि जांच में कई और चौंकाने वाले नाम आ सकते हैं.
Hazaribagh Treasury Scam: एक सिपाही ने कैसे कर दिया 28 करोड़ का घोटाला
Jharkhand Crime News: झारखंड के हजारीबाग से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. 28 करोड़ रुपये के भारी-भरकम ट्रेजरी घोटाले में सिपाही का नाम सामने आया है. वह ना केवल इसमें शामिल था,बल्कि वह पूरे घोटाले का मास्टर माइंड निकला. हैरत की बात यह है कि 8 साल के दौरान प्रदेश के सिपाही ने सिपाही ने 28 करोड़ रुपये का ट्रेजरी घोटाला कर डाला जबकि सरकारी सिस्टम सोता रहा. अब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने इसका जांच के आदेश दिए हैं. अब सीआईडी इसकी जांच करेगी और इस पूरे घोटाले को जनता के सामने लाएगी.
वहीं, कार्रवाई की कड़ी में 28 करोड़ के ट्रेजरी घोटाले के मास्टरमाइंट सिपाही के आलीशान घर को सील कर दिया गया है. इसके साथ ही हजारीबाग में सामने आए इस 28 करोड़ रुपये का ट्रेजरी घोटाला अब झारखंड की सियासत और सिस्टम दोनों के लिए बड़ा सवाल बन गया है. हैरत की बात यह है कि सरकारी खजाने से करोड़ों की अवैध निकासी होती रही और जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी. सीएम की मंजूरी मिलते ही पूरे मामले की जांच CID करेगी.
इस घोटाले का मास्टरमाइंड कोई बड़ा अधिकारी नहीं, बल्कि पुलिस विभाग का एक सिपाही शंभू कुमार निकला है. आरोप है कि उसने अकाउंट सेक्शन में तैनाती के दौरान अपने नेटवर्क के साथ मिलकर फर्जी ट्रांजैक्शन का ऐसा जाल बुना कि 8 साल तक सरकारी खजाने से पैसे निकलते रहे और सिस्टम आंख मूंदे बैठा रहा. शुक्रवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भवानी चौक के दुपुगढ़ा इलाके में बने शंभू कुमार के आलीशान घर को सील कर दिया. इससे पहले उसे और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है.
जांच में अब तक जो सामने आया है, वह चौंकाने वाला है. करीब 28 करोड़ रुपये फर्जी लेन-देन के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए. इस पूरे खेल में 21 संदिग्ध खातों की पहचान हुई है, जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है. इन खातों में मौजूद करीब 1.60 करोड़ रुपये को फिलहाल सुरक्षित कर लिया गया है.
जानकारों का कहना है कि 28 करोड़ रुपये के इस भारी भरकम घोटाले में सिपाही शंभू कुमार अकेला नहीं हो सकता है. इसमें कई बड़ै अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं. अगर जांच ईमानदारी से आगे बढ़ी तो कई और लोगों के खिलाफ शिकंजा कस सकता है.
रिपोर्टर: मनीष मेहता
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