Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के त्योहार को बेहद पवित्र माना जाता हैं, इस पर्व में मां दुर्गा की पूजा की जाती है. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना यानी कलश स्थापना से होती है, आइए जानते हैं यहां कि नवरात्र में कलश स्थापना सही विधि क्या है और इसके लिए किस-किस सामग्री की जरूरत पड़ती है.
चैत्र नवरात्रि 2026 कलश स्थापना
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि के त्योहार को बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा की पूजा की जाती है. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना यानी कलश स्थापना से होती है, जिसे देवी शक्ति के आगमन का प्रतीक कहा जाता है. वहीं धर्म शास्त्रों के अनुसार, अगर कलश स्थापना सही विधि और शुभ मुहूर्त में की जाए, तो नवरात्रि में मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है. आइए जानते हैं यहां कि नवरात्र में कलश स्थापना सही विधि क्या है और इसके लिए किस-किस सामग्री की जरूरत पड़ती है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है. साल 2026 में यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है. इसी दिन ही कलश स्थापना के साथ नवरात्रि का प्रारंभ किया जाएगा. घटस्थापना का मुहूर्त प्रातःकाल का सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय के बाद और अभिजीत काल से पहले घटस्थापना करना विशेष फलदायी होता है, इस मुहूर्त में की गई कलश स्थापना देवी दुर्गा के स्वागत का प्रतीक मानी जाती है.
प्राथमिक मुहूर्त: 19 मार्च 2026, सुबह 6:52 बजे से 7:53 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: 19 मार्च 2026, दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
नवरात्रि में कलश स्थापना (घटस्थापना) के लिए मुख्य सामग्री में मिट्टी का पात्र, जौ, कलश (तांबा/मिट्टी), गंगाजल, मौली (कलावा), आम के पत्ते, नारियल (चुनरी सहित), सुपारी, सिक्का, अक्षत (साबुत चावल), हल्दी की गांठ, और सुगंधित इत्र शामिल हैं. यह दी गई सामग्री मां दुर्गा के आह्वान के लिए आवश्यक है.
नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की विधिपूर्वक आराधना करने के लिए भी जरूरी सामग्रियों की आवश्यकता होती है, जैसे कलश, नारियल, फूल, माला, अक्षत (चावल), हल्दी, सिंदूर, फल, मिठाइयां आदि।
नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को अच्छी तरह से साफ करें. इसके बाद पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. फिर मिट्टी से एक छोटा पात्र भरकर उसमें जौ (जवारे) बो दें. इसके ऊपर पानी से भरा हुआ तांबे या मिट्टी का कलश रख दें. यह सब करने के बाद कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें. कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें. इसके बाद नारियल को लाल चुनरी से लपेट दें. इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करते हुए विधिपूर्वक पूजा करें और दीपक जलाकर नवरात्रि की शुरुआत करें.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि में कलश स्थापना का बेहद महत्व होता है, क्योंकि कलश में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) का वास होता है और कलश स्थापना इसलिए किया जाता है ताकि सभी देवी-देवताओं को एक स्थान पर आमंत्रित किया जा सके. कलश स्थापना से घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, इसलिए नवरात्रि के पहले दिन घर या मंदिर में कलश स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है
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