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Diwali 2025: इस बार पंचदिवसीय दीपोत्सव होगा छह दिवसीय, खुशियों की इस त्योहार की सारी तिथियां यहां जानें

Diwali 2025: इस वर्ष पंचदिवसीय दीपोत्सव का उत्सव छह दिनों तक मनाया जाएगा. यह पर्व घर-परिवार में आनंद और समृद्धि का संदेश लाता है. इसकी तिथियों को पहले से जान लेना जरूरी है ताकि यदि आप बाहर रहते हैं तो छुट्टियों की योजना बना सकें या कहीं घूमने का विचार कर रहे हों तो कार्यक्रम सही तरीके से तय कर पाएं. हालांकि, दीपावली का असली आनंद अपने घर में परिवार संग मनाने में ही है. इस दिन कार्तिक अमावस्या को प्रथम पूज्य गणेश जी, धन की देवी महालक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर महाराज की पूजा का विशेष महत्व है. उनका घर पर आह्वान करने से धन, सौभाग्य और खुशहाली आती है.

Diwali 2025: इस वर्ष पंचदिवसीय दीपोत्सव का उत्सव छह दिनों तक मनाया जाएगा. यह पर्व घर-परिवार में आनंद और समृद्धि का संदेश लाता है. इसकी तिथियों को पहले से जान लेना जरूरी है ताकि यदि आप बाहर रहते हैं तो छुट्टियों की योजना बना सकें या कहीं घूमने का विचार कर रहे हों तो कार्यक्रम सही तरीके से तय कर पाएं. हालांकि, दीपावली का असली आनंद अपने घर में परिवार संग मनाने में ही है. इस दिन कार्तिक अमावस्या को प्रथम पूज्य गणेश जी, धन की देवी महालक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर महाराज की पूजा का विशेष महत्व है. उनका घर पर आह्वान करने से धन, सौभाग्य और खुशहाली आती है.

धनतेरस से होगी शुरुआत

दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होगी, जब घरों में दीप जलाकर स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है. इसी दिन आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरि की पूजा भी की जाती है.

नरक चतुर्दशी का महत्व

दूसरे दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी, जिसे रूप चतुर्दशी या छोटी दीपावली भी कहा जाता है. यह दिन यमराज की पूजा के लिए समर्पित है. परंपरा है कि शाम को घर के बाहर, विशेषकर नाली के पास दीपक जलाया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से आयु लंबी होती है और रूप-लावण्य बना रहता है. इस बार चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर को लगेगी, लेकिन अरुणोदय स्नान 20 अक्टूबर को किया जाएगा.

मुख्य दीपावली 21 अक्टूबर को

यद्यपि अमावस्या 20 अक्टूबर को लग जाएगी, लेकिन शास्त्रों के अनुसार यदि अगले दिन की अमावस्या का समय अधिक अनुकूल हो, तो दीपावली उसी दिन मनाई जाती है. इस कारण इस बार मुख्य दीपोत्सव 21 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा. इसी दिन लक्ष्मी पूजन और दीपदान का विशेष महत्व रहेगा.

गोवर्धन पूजा और भाई दूज

चौथे दिन यानी 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा होगी. यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और सहयोग की भावना को समर्पित है. इसी दिन उन्होंने इंद्र का अभिमान तोड़ने और गोकुलवासियों को वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर धारण किया था.पाचवें दिन 23 अक्टूबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा, जो भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है.

Pandit Shashishekhar Tripathi

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