Live TV
Search
Home > धर्म > Dussehra 2026: दशहरे पर दिख जाए ये पक्षी तो खुल सकती है किस्मत! जानें भगवान राम से क्या है इसका संबंध

Dussehra 2026: दशहरे पर दिख जाए ये पक्षी तो खुल सकती है किस्मत! जानें भगवान राम से क्या है इसका संबंध

Dussehra 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका पर हमला करने और रावण को मारने से पहले, भगवान राम ने नीलकंठ पक्षी को देखा था, जिससे आखिरकार उनकी जीत हुई. एक और मान्यता के अनुसार, रावण को मारने के बाद, भगवान राम ने भगवान शिव से ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने की प्रार्थना की थी.

Written By:
Last Updated: October 19, 2026 17:09:24 IST

Mobile Ads 1x1

Neelkanth on Dussehra 2026: दशहरा या विजयदशमी का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था, इसलिए पूरे देश में दशहरा बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. 2026 में, दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन एक खास पक्षी को देखना बहुत शुभ माना जाता है. माना जाता है कि दशहरे पर इस पक्षी को देखने से जीवन में सौभाग्य, सुख, समृद्धि और सफलता के द्वार खुल सकते हैं. इस पक्षी को नीलकंठ पक्षी कहा जाता है, जिसे भगवान शिव का प्रतीक भी माना जाता है. दशहरे पर नीलकंठ पक्षी को देखना इतना शुभ क्यों माना जाता है, और इसका भगवान राम की जीत से क्या संबंध है? आइए जानते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका पर हमला करने और रावण को मारने से पहले, भगवान राम ने नीलकंठ पक्षी को देखा था, जिससे आखिरकार उनकी जीत हुई. एक और मान्यता के अनुसार, रावण को मारने के बाद, भगवान राम ने भगवान शिव से ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने की प्रार्थना की थी. तब भगवान शिव ने उन्हें नीलकंठ पक्षी के रूप में दर्शन दिए. इसीलिए दशहरे पर नीलकंठ पक्षी को देखना सौभाग्य और जीत का प्रतीक माना जाता है.

दशहरा 2026 शुभ समय

2026 में, दशहरा, या विजयादशमी, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस दिन रावण की पूजा और दहन के लिए अलग-अलग समय महत्वपूर्ण हैं.

  • दशमी तिथि शुरू: 20 अक्टूबर, 2026, दोपहर 12:51 बजे
  • दशमी तिथि खत्म: 21 अक्टूबर, 2026, दोपहर 2:11 बजे
  • विजया मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से दोपहर 2:45 बजे तक
  • दोपहर पूजा का समय: दोपहर 1:14 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक
  • प्रदोष काल और रावण दहन का समय: शाम 5:47 बजे, सूर्यास्त के बाद

क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार, उत्तर और पश्चिम भारत में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पूर्वी क्षेत्रों में बिजॉय दशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस साल दशहरे पर तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र का मेल शुक्रादित्य और बुधादित्य योग बना रहा है.

दशहरे पर नीलकंठ का दिखना शुभ क्यों माना जाता है?

हिंदू धर्म में विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी को देखना बहुत शुभ और सौभाग्यशाली माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नीलकंठ पक्षी भगवान शिव का प्रतीक है. जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विष पिया था, तो उनका गला नीला हो गया था. इसीलिए महादेव को नीलकंठ कहा जाता है.

माना जाता है कि दशहरे पर इस पक्षी को देखने से साल भर के पाप धुल जाते हैं और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं. इसे घर में सुख-समृद्धि, धन और काम की जगह पर सफलता का संकेत भी माना जाता है. इसीलिए दशहरे पर नीलकंठ पक्षी को देखने को खास महत्व दिया जाता है.

दशहरे पर नीलकंठ देखने की परंपरा और मंत्र

दशहरे की सुबह लोग छत या खुले मैदान में नीलकंठ पक्षी को देखने की कोशिश करते हैं. माना जाता है कि इस दिन नीलकंठ पक्षी को देखना अच्छी किस्मत का संकेत माना जाता है. ऐसे में लोग हाथ जोड़कर पारंपरिक कहावत दोहराते हैं:

“नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो, हमरी बात राम से कहियो.”

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इंडिया न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है.

MORE NEWS

Home > धर्म > Dussehra 2026: दशहरे पर दिख जाए ये पक्षी तो खुल सकती है किस्मत! जानें भगवान राम से क्या है इसका संबंध

Written By:
Last Updated: October 19, 2026 17:09:24 IST

Mobile Ads 1x1

Neelkanth on Dussehra 2026: दशहरा या विजयदशमी का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था, इसलिए पूरे देश में दशहरा बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. 2026 में, दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन एक खास पक्षी को देखना बहुत शुभ माना जाता है. माना जाता है कि दशहरे पर इस पक्षी को देखने से जीवन में सौभाग्य, सुख, समृद्धि और सफलता के द्वार खुल सकते हैं. इस पक्षी को नीलकंठ पक्षी कहा जाता है, जिसे भगवान शिव का प्रतीक भी माना जाता है. दशहरे पर नीलकंठ पक्षी को देखना इतना शुभ क्यों माना जाता है, और इसका भगवान राम की जीत से क्या संबंध है? आइए जानते हैं.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका पर हमला करने और रावण को मारने से पहले, भगवान राम ने नीलकंठ पक्षी को देखा था, जिससे आखिरकार उनकी जीत हुई. एक और मान्यता के अनुसार, रावण को मारने के बाद, भगवान राम ने भगवान शिव से ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने की प्रार्थना की थी. तब भगवान शिव ने उन्हें नीलकंठ पक्षी के रूप में दर्शन दिए. इसीलिए दशहरे पर नीलकंठ पक्षी को देखना सौभाग्य और जीत का प्रतीक माना जाता है.

दशहरा 2026 शुभ समय

2026 में, दशहरा, या विजयादशमी, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस दिन रावण की पूजा और दहन के लिए अलग-अलग समय महत्वपूर्ण हैं.

  • दशमी तिथि शुरू: 20 अक्टूबर, 2026, दोपहर 12:51 बजे
  • दशमी तिथि खत्म: 21 अक्टूबर, 2026, दोपहर 2:11 बजे
  • विजया मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से दोपहर 2:45 बजे तक
  • दोपहर पूजा का समय: दोपहर 1:14 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक
  • प्रदोष काल और रावण दहन का समय: शाम 5:47 बजे, सूर्यास्त के बाद

क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार, उत्तर और पश्चिम भारत में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पूर्वी क्षेत्रों में बिजॉय दशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस साल दशहरे पर तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र का मेल शुक्रादित्य और बुधादित्य योग बना रहा है.

दशहरे पर नीलकंठ का दिखना शुभ क्यों माना जाता है?

हिंदू धर्म में विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी को देखना बहुत शुभ और सौभाग्यशाली माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नीलकंठ पक्षी भगवान शिव का प्रतीक है. जब भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विष पिया था, तो उनका गला नीला हो गया था. इसीलिए महादेव को नीलकंठ कहा जाता है.

माना जाता है कि दशहरे पर इस पक्षी को देखने से साल भर के पाप धुल जाते हैं और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं. इसे घर में सुख-समृद्धि, धन और काम की जगह पर सफलता का संकेत भी माना जाता है. इसीलिए दशहरे पर नीलकंठ पक्षी को देखने को खास महत्व दिया जाता है.

दशहरे पर नीलकंठ देखने की परंपरा और मंत्र

दशहरे की सुबह लोग छत या खुले मैदान में नीलकंठ पक्षी को देखने की कोशिश करते हैं. माना जाता है कि इस दिन नीलकंठ पक्षी को देखना अच्छी किस्मत का संकेत माना जाता है. ऐसे में लोग हाथ जोड़कर पारंपरिक कहावत दोहराते हैं:

“नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो, हमरी बात राम से कहियो.”

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इंडिया न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है.

MORE NEWS