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‘सखी के हनुमानजी’… यहां माताओं के शृंगार में विराजमान हैं बजरंगबली, जानिए कहां है वह पावन पवित्र स्थान

Sakhi Hanuman Temple: हनुमानजी को शक्ति का देवता कहा जाता है. इनको आपने कई रूप में देखा होगा जैसे- संकट मोचन, बाल हनुमान, वीर हनुमान और पचंमुखी. लेकिन, उत्तर प्रदेश के एक प्राचीन मंदिर में हनुमानजी का शृंगार एक देवी के रूप में किया जाता है. इस मंदिर की कथा बहुत रोचक है. तो चलिए जानते हैं मंदिर की मान्यता, पौराणिक कथा और महत्व के बारे में-

Sakhi Hanuman Temple: ये सच है कि, अनादिकाल से भारत संत, महात्माओं, योगियों और ऋषियों की तपोभूमि रहा है. एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र, जिसने युगों-युगों से दुनिया को शांति, दर्शन और आत्म-ज्ञान का मार्ग दिखाया है. हिमालय से लेकर दक्षिण के सागर तट तक कई प्रसिद्ध धार्मिक मंदिर हैं, जिनमें प्रमुख रूप से हिन्दू मंदिरों में वैष्णो देवी, तिरुपति (वेंकटेश्वर), स्वर्ण मंदिर (अमृतसर), केदारनाथ, बद्रीनाथ, काशी विश्वनाथ, रामेश्वरम और जगन्नाथ पुरी शामिल हैं. इन ऐतिहासिक मंदिरों की अपनी पहचान, पौराणिक कथा और महत्व है. इसी क्रम में एक और ऐसा चमत्कारी मंदिर है, जिसे सखी के हनुमानजी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है. उत्तर प्रदेश में स्थिति इस मंदिर में हनुमान जी स्त्रियों के शृंगार में हैं. 

धर्मिक ग्रंथों के अनुसार, हनुमानजी को शक्ति का देवता कहा जाता है. इनको आपने अनेक रूप में देखा होगा जैसे- संकट मोचन, बाल हनुमान, वीर हनुमान और पचंमुखी. लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगा कि उत्तर प्रदेश के झांसी में एक प्राचीन मंदिर हैं जहां हनुमानजी का शृंगार एक देवी के रूप में किया जाता है. इस मंदिर की कथा बहुत रोचक है. इस मंदिर से जुड़ी कई रोचक बातें भी हैं. तो चलिए जानते हैं मंदिर की मान्यता, पौराणिक कथा और महत्व के बारे में-

स्त्री रूप में विराजमान हैं बजरंग बली

इस मंदिर में पवन पुत्र हनुमान एक विचित्र रूप में विराजमान हैं. यहां बजरंग बली स्त्री रूप में विराजमान हैं. मंदिर के महंत ने बताया कि बजरंग बली के स्त्री रूप का वर्णन आनंद रामायण की एक चौपाई “चारुशिला नामक सखी सदा रहत सिय संग, इत दासी उत दास हैं, त्रिया तन्य बजरंग” में मिलता है. इस चौपाई में बताया गया है कि माता सीता की सेवा करने के लिए बजरंग बली ने स्त्री रूप लिया था. बजरंग बली के इसी अवतार की पूजा इस मंदिर में होती है.

500 साल पुराना है यह मंदिर

मंदिर के इतिहास की बात करें तो कहा जाता है कि करीब 500 साल पहले ओरछा में एक सखी बाबा नाम के संत थे. मान्यताओं के अनुसार बाबा के सपने में एक स्थान पर हनुमानजी की सखी वेश में प्रतिमा दिखाई दी. इसके साथ ही उन्हें यह भी आदेश हुआ की इस प्रतिमा को ओरछा के पास ही स्थापित किया जाए. इसके बाद उस संत ने इस प्रतिमा को झांसी के पास ही स्थापित कर दिया.

हनुमान मंदिर से जुड़ी मान्यताएं

झांसी में स्थिति हनुमानजी के प्राचीन मंदिर से जुड़ी तमाम मान्यताएं हैं. लोगों का ये भी कहना है कि यहां जो भी इच्छा मांगों वह जरूर पूरी होती है. यही कारण है दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं. नि:संतान दंपत्ति को यहां दर्शन करने से संतान प्राप्ति होती है, ऐसी भी मान्यता है.

हनुमानजी ने कब लिया स्त्री रूप?

वाल्मीकि या अन्य किसी रामायण में हनुमानजी के स्त्री रूप का वर्णन मिलता, सिर्फ आनंद रामायण में मिलता है. उसके अनुसार जब हनुमानजी ने लंका में जाकर सीता माता की खोज को तो स्त्री रूप धारण किया था. आनंद रामायण में इस चौपाई में हनुमानजी के स्त्री रूप का वर्णन मिलता है- ‘चारुशिला नामक सखी सदा रहत सिय संग, इत दासी उत दास हैं, त्रिया तन्य बजरंग.’ यानी हनुमान जी ने चारुशिला नामक सखी बनकर देवी सीता की सेवा की थी.

Lalit Kumar

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