US+इजराइल vs ईरान: क्या खामेनेई का मिसाइल जाल और घातक ड्रोन ट्रंप के 'जॉइंट ऑपरेशन' को रोक पाएंगे? जानिए उस गुप्त सैन्य शक्ति के बारे में जो युद्ध का पासा पलट सकती है!
USA-Iran War: इज़राइल ने शनिवार सुबह (भारतीय समय के अनुसार) ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने भी इज़राइल पर जवाबी हमले किए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में करीब 400 मिसाइलें दागीं. इज़राइल के अलावा, ईरान ने कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में US के ठिकानों पर भी हमला किया. ईरान ने UAE के सबसे ज़्यादा आबादी वाले शहर दुबई को भी निशाना बनाया. दरअसल, इज़राइल ने ईरान की इंटेलिजेंस मिनिस्ट्री, डिफेंस मिनिस्ट्री, सुप्रीम लीडर खामेनेई के ऑफिस और ईरान के एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइज़ेशन को निशाना बनाया. हमले के बाद खामेनेई को सुरक्षित जगह पर ले जाया गया है.
इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अपने नए कैंपेन को ‘शेर की दहाड़’ नाम दिया है. अल जज़ीरा ने US अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह US और इज़राइल के बीच मिली-जुली मिलिट्री कार्रवाई है. यह हमला ईरान और अमेरिका के बीच चल रही न्यूक्लियर हथियारों की बातचीत के बीच हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला करने की धमकी दी है. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद अमेरिका और उसके लोगों को खतरे से बचाना है. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइलों को नष्ट करने और उसके मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने की कोशिश कर रही है. अब बात आती है की ऐसे ही युद्ध की स्थिति बनी रही तो आखिर किसका पलड़ा भारी पड़ेगा। आइये देखते हैं अमेरिका और इजरायल के जॉइंट ऑपरेशन पर ईरान कैसे भारी पड़ सकता है…
अमेरिकन थिंक टैंक Council on Foreign Relations की जून 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में करीब 40,000 US सैनिक तैनात हैं, जिनमें से कई युद्धपोतों और एयर बेस पर मौजूद हैं. आपको बता दें कि US के लगभग 19 मिलिट्री बेस इस इलाके में फैले हुए हैं, जिनमें बहरीन, मिस्र, इराक, इज़राइल, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, सीरिया और UAE शामिल हैं. कतर का Al Udeid Air Base इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अमेरिकी बेस है. बहरीन में US Navy का 5th Fleet तैनात है. जिबूती और तुर्की में भी अमेरिका के अहम ऑपरेशनल बेस हैं. यह नेटवर्क अमेरिका और इजराइल को जॉइंट ऑपरेशन, एयर स्ट्राइक और मिसाइल डिफेंस में बड़ा रणनीतिक फायदा देता है.
अब मिलिट्री पावर की बात करें तो, संख्याओं और टेक्नोलॉजी में अमेरिका दुनिया की नंबर वन ताकत है, लेकिन ईरान की शक्ति को कम आंकना भी बड़ी भूल होगी. Global Firepower Index के अनुसार, अमेरिका का डिफेंस बजट लगभग $895 बिलियन हैं. उसके पास 1.4 मिलियन एक्टिव ड्यूटी सैनिक हैं, 13,000 से ज़्यादा एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें स्टेल्थ फाइटर जेट भी शामिल हैं. वहीं ईरान के पास मिलिट्री पावर, रैंकिंग में 16वें स्थान पर है. वहीं बजट अमेरिका से काफी कम है, लेकिन मिसाइल और ड्रोन कैपेबिलिटी में ईरान बेहद मजबूत है.
ईरान की रणनीति अमेरिका जैसी एयर पावर से मुकाबले की नहीं, बल्कि असमान युद्ध रणनीति की है. लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें, सटीक निशाना लगाने वाले ड्रोन, क्षेत्र में फैले प्रॉक्सी नेटवर्क. ईरान सीधे युद्ध की बजाय US और इज़राइली बेस, नेवी शिप्स और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने की क्षमता रखता है. यही वजह है कि कम बजट के बावजूद ईरान अमेरिका की रणनीतिक गणनाओं को चुनौती देता है.
अमेरिका और इज़राइल मिलकर तकनीक, एयर पावर और जॉइंट डिफेंस सिस्टम में बेहद मजबूत हैं, लेकिन ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता इस पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंकने की ताकत रखती है। यही कारण है कि यह टकराव सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि रणनीति, धैर्य और जवाबी क्षमता की जंग बन चुका है।
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