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क्या सच में महिलाओं का श्मशान जाना मना है? गरुड़ पुराण में बताए गए कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

Garud Puran: सनातन धर्म में अंतिम संस्कार से जुड़ी कई परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं. इन्हीं में एक मान्यता यह भी है कि महिलाओं का श्मशान घाट जाना सही नहीं माना जाता.आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से .

Garuda Purana rules for cremation: हिंदू परंपराओं में अंतिम संस्कार को एक बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है, जिसके जरिए शरीर को पंचतत्व में विलीन किया जाता है. आमतौर पर इस संस्कार में पुरुषों की भागीदारी ज्यादा देखने को मिलती है, जबकि महिलाओं के श्मशान घाट जाने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित रही हैं. यही वजह है कि कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर इसके पीछे धार्मिक आधार क्या है.

गरुड़ पुराण में श्मशान से जुड़े नियमों और मान्यताओं का उल्लेख मिलता है. ऐसा कहा जाता है कि अंतिम संस्कार के समय का वातावरण काफी भावनात्मक  होता है. इस दौरान हर कोई शोक में रहता है. परंपरागत सोच के अनुसार, महिलाएं ज्यादा भावात्मक होती है, इसलिए उन्हें इस परिस्थिति से दूर रखना चाहिए.

महिलाओं का श्मशान घाट जाना क्यों है वर्जित

कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि दाह संस्कार के दौरान होने वाली विधियां मानसिक रूप से विचलित कर सकती है. पहले के समय में इसे ध्यान में रखते हुए महिलाओं को श्मशान जाने से रोका गया, ताकि वे ऐसे माहौल से प्रभावित न हों.इसके साथ ही श्मशान को एक ऐसा स्थान माना गया है, जहां का वातावरण सामान्य जगहों की तुलना में अलग और गंभीर होता है. धार्मिक दृष्टि से यहां ऊर्जा का प्रभाव भी अलग बताया जाता है, जिसे लेकर लोगों में कई तरह की धारणाएं रही हैं. इन्हीं कारणों से यह परंपरा लंबे समय तक चली. हालांकि आज के दौर में समाज की सोच बदल रही है और कई परिवारों में महिलाएं भी अंतिम संस्कार में भाग ले रही हैं.

क्या महिलाएं कर सकती हैं अंतिम संस्कार

जहां तक अंतिम संस्कार करने की बात है, तो धार्मिक मान्यताओं में महिलाओं को इससे पूरी तरह वंचित नहीं किया गया है. अगर किसी परिवार में पुरुष सदस्य मौजूद नहीं हो, तो पत्नी, बेटी या बहन भी इस जिम्मेदारी को निभा सकती हैं. यहां तक कि यदि कोई परिजन ही न हो, तो समाज का कोई जिम्मेदार व्यक्ति यह कर्तव्य निभाता है.

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

Shivashakti narayan singh

मूल रूप से चन्दौली जनपद के निवासी शिवशक्ति नारायण सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. वर्तमान में वे इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. एस्ट्रो (ज्योतिष) और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा हेल्थ और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं.तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है.डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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