Hariyali teej aur hartalika teej me antar: हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों ही भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित महत्वपूर्ण पर्व हैं, लेकिन दोनों की तिथि, व्रत के नियम और परंपराएं अलग हैं. हरियाली तीज सावन में मनाई जाती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है. जानिए 2026 में दोनों तीज कब हैं और इनके बीच क्या खास अंतर है.
हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंत
Hariyali teej aur hartalika teej me antar: सनातन धर्म में तीज पर्व का विशेष महत्व माना गया है. खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए हरियाली तीज और हरतालिका तीज दोनों महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. हालांकि नाम में समानता होने के बावजूद दोनों त्योहारों की मान्यताएं और पूजा-पद्धति अलग-अलग हैं. हरियाली तीज सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद यानी भादों मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है.
साल 2026 में हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है. इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं, हरी चूड़ियां और मेहंदी लगाकर सोलह शृंगार करती हैं. कई स्थानों पर महिलाएं झूला झूलने और तीज के गीत गाने की परंपरा भी निभाती हैं. कुछ महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं, हालांकि हरियाली तीज का व्रत हर जगह अनिवार्य नहीं माना जाता.
वहीं, हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. इसे कई जगहों पर बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से कठिन व्रत रखती हैं. हरतालिका तीज का व्रत विशेष रूप से निर्जला रखने की परंपरा है. पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसी मान्यता से हरतालिका तीज के व्रत को जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठिन व्रत और तप किया था. इसलिए इस दिन महिलाएं श्रद्धा और आस्था के साथ शिव-पार्वती की पूजा करती हैं.
हरियाली तीज और हरतालिका तीज के बीच व्रत को लेकर भी महत्वपूर्ण अंतर है. हरियाली तीज का व्रत अपेक्षाकृत सरल माना जाता है और कई जगह महिलाएं फलाहार या जल ग्रहण करके व्रत रखती हैं. वहीं हरतालिका तीज का व्रत अधिक कठिन माना जाता है, जिसमें महिलाएं निर्जला व्रत रखने की परंपरा निभाती हैं.
हरियाली तीज की पहचान हरे रंग के वस्त्र, हरी चूड़ियां, मेहंदी, झूले और तीज के गीतों से होती है. दूसरी ओर, हरतालिका तीज में शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करना और रात्रि जागरण करना प्रमुख परंपराओं में शामिल है. इस तरह दोनों पर्व शिव-पार्वती को समर्पित होने के बावजूद अपनी अलग धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के कारण खास पहचान रखते हैं.
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