Janaki Jayanti-kalashtami 2026: आज फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और सोमवार का दिन है. आज जानकी जयंती और कालाष्टमी है. ये दोनों ही कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आते हैं. इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से माता सीता की जयंती और भगवान शिव के रुद्रावतार बाबा भैरवनाथ की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से माता सीता और भगवान राम की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है. इन दोनों का धार्मिक महत्व और पूजा विधि क्या है? आइए जानते हैं इस बारे में-
आज सीता जयंती और कालाष्टमी पर पूजा मुहूर्त और महत्व.
Janaki Jayanti-kalashtami 2026: आज फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और सोमवार का दिन है. 9 फरवरी का यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है. इसी दिन जहां जानकी जयंती है, वहीं कालाष्टमी भी है. ये दोनों ही कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आते हैं. इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से माता सीता की जयंती और भगवान शिव के रुद्रावतार बाबा भैरवनाथ की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से माता सीता और भगवान राम की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है. वहीं, बाबा भैरवनाथ को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है. मान्यता है कि, भैरवनाथ की पूजा और उनका जाप करने से भक्तों का कल्याण होता है. इसके साथ ही भय, दुख, कष्ट, पाप और नकारात्मकता समाप्त होती है. अब सवाल है कि आखिर अष्टमी तिथि कब से कब तक रहेगी? सीता जयंती क्यों मनाई जाती है? कालाष्टमी क्यों मनाते हैं? इन दोनों का धार्मिक महत्व और पूजा विधि क्या है? आइए जानते हैं इस बारे में-
अष्टमी तिथि सोमवार को पूरा दिन पूरी रात पर कर के मंगलवार सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगी. 9 फरवरी रात 12 बजकर 52 मिनट तक वृद्धि योग रहेगा. साथ ही सोमवार को पूरा दिन पूरी रात पर कर के मंगलवार सुबह 7 बजकर 55 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा.
प्रत्येक वर्ष फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ही माता सीता का प्राकट्य दिवस माना जाता है. इस दिन को सीताष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. बता दें कि, हिंदू धर्म में माता सीता को आदर्श नारी, त्याग और धैर्य की प्रतिमूर्ति माना जाता है. भगवान श्रीराम की अर्धांगिनी माता सीता के जन्मोत्सव को जानकी जयंती के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सीता का जन्म मिथिला में राजा जनक के घर हुआ था, इसलिए उन्हें जानकी भी कहा जाता है. माता सीता का जीवन नारी शक्ति, मर्यादा और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है. जानकी जयंती के दिन माता सीता की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है. खासतौर पर सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं.
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:29 से 06:20 तक
प्रातः संध्या: सुबह 05:54 से 07:10 तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:30 से 01:16 तक
जानकी जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें और साफ वस्त्र धारण करें. घर के मंदिर या पूजा स्थान को स्वच्छ करें. इसके बाद माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. सबसे पहले माता सीता को हल्दी, चंदन और कुमकुम अर्पित करें. इसके बाद घी का दीपक जलाएं और माता को शृंगार सामग्री जैसे कंगन, बिंदी, चूड़ी आदि अर्पित करें. माना जाता है कि इससे माता प्रसन्न होती हैं. पूजा में फल, पीली मिठाई या घर पर बना सात्विक प्रसाद माता को भोग के रूप में लगाएं. इसके बाद श्रद्धा भाव से माता सीता और भगवान राम के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना करें.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान काल भैरव की पूजा रात्रि (निशा काल) में की जाती है, इसलिए कालाष्टमी 09 फरवरी को ही मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, 10 जनवरी 2026 को रात 12:02 बजे से 12:56 बजे के बीच आप पूजा कर सकते हैं. रात में पूजा न कर सकें, तो दिन में भी भगवान भैरव के दर्शन और पूजा कर सकते हैं.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हनुमान जी का व्रत करने से कुंडली के मौजूद सभी ग्रह शांत रहते हैं और हनुमान जी की असीम कृपा भी प्राप्त होती है. इतनी ही नहीं, संतान प्राप्ति के लिए भी हनुमान जी के व्रत को सर्वोत्तम माना जाता है. अगर आप मंगलवार का व्रत करना चाहते हैं तो इसे लगातार 21 मंगलवार तक करना चाहिए. इससे आपके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे
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