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Magh Vinayak Chaturthi 2026: कब है माघ विनायक चतुर्थी व्रत? बनेगा रिव योग, लगेगी भद्रा! जानें गणेश जयंती की सही तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त

When is Ganesh Jayanti?: प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाता हैं. इस भगवान गणेश की पूजा का विधान है, महिलाए ये व्रत अपने बच्चों के सुखी जीवन, या फिर संतान प्राप्ति की कामना के लिए करती हैं. आइये जानते हैं यहां कि साल 2026 की जनवरी में माघ विनायक चतुर्थी व्रत कब किया जाएगा? इसकी सही डेट क्या है और इस दिया क्या योग बन रहा है. इसके अलावा जानें यहां विनायक चतुर्थी व्रत के दिन शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि.

Magh Vinayak Chaturthi Vrat 2026: हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी व्रत किया जाता, हिंदू धर्म में इस व्रत को बेहद खास माना जाता है, क्योंकि महिलाए ये व्रत अपने बच्चों के सुखी और शांत जीवन की कामना के लिए और संतान प्राप्ती के लिए करती हैं. इसके अलावा इस व्रत को सुख-समृद्धि, ज्ञान, बुद्धि और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है. विनायक चतुर्थी व्रत में  भगवान गणेश की पूजा का विधान है, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता. मान्यताओं के अनुसार, जो भी विनायक चतुर्थी का व्रत करता है, भगवान गणेश उसके साकरे विघ्न हर लेते है और उसे ज्ञान-बुद्धि का वरदान देते हैं. इस समय माघ का महीना चल रहा है और माघ में आने वाली विनायक चतुर्थी, को  माघ  विनायक चतुर्थी कहा जाता है. आइये जानते हैं यहां कि साल 2026 की जनवरी में माघ विनायक चतुर्थी व्रत कब किया जाएगा?,इस दिया क्या योग बन रहा है. इसके अलावा जानें यहां विनायक चतुर्थी व्रत के दिन शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि

कब है माघ विनायक चतुर्थी व्रत?

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल माघ मास की चतुर्थी इस तिथि की शुरुआत 22 जनवरी के दिन देर रात 2 बजकर 44 मिनट पर हो रही है और इसका समापन 23 जनवरी को सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर होगा. ऐसे में माघ मास की विनायक चतुर्थी का व्रत 22 जनवरी 2026 को रखा जाएगा. इस साल गणेश जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त 2 घंटे 8 मिनट का है. इस दिन गणेश जी की पूजा  सुबह11 बजकर 29 मिनट से शुरू कर सकते हैं, मुहूर्त का समापन दोपहर में 1 बजकर 37 मिनट पर होगा. 

रवि योग और वरीयान योग का निर्माण

पंचांग के अनुसार विनायक चतुर्थी व्रत के दिन रवि योग और वरीयान योग और परिघ योग भी बन रहे हैं. गणेश जयंती पर रवि योग सुबह 07 बजकर 14 मिनट से बनेगा और यह दोपहर में 02 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र में यह एक बेहद शुभ योग माना जाता है, रवि योग तब बनता है, जब जब चंद्रमा का नक्षत्र, सूर्य के नक्षत्र से चौथे, छठे, नवें, दसवें और तेरहवें स्थान पर होता है. यह एक ऐसा शक्तिशाली योग है, जिसमें किसी भी नए कार्य की शुरुआत, निवेश, यात्रा, शिक्षा या व्यवसाय से संबंधित काम की शुरुआत करना अत्यंत लाभकारी होता है. 

इस अशुभ योग में ना करें कोई काम

विनायक चतुर्थी व्रत के दिन वरीयान योग प्रात:काल से लेकर शाम को 05 बजकर 38 मिनट तक रहेगाा है, उसके बाद से परिघ योग बनेगा. वरीयान योग भी ज्योतिष में एक शुभ योग माना जाता है, जिसका अर्थ है 'उत्कृष्ट', 'लाभदायक', या 'श्रेष्ठ', जो धन, सफलता और सुख-समृद्धि लाता है. वही परिघ योग को ज्योतिष शास्त्र में 27 नित्य योगों में से एक है, जिसे शनि ग्रह द्वारा शासित एक अशुभ योग माना जाता है, जो जीवन में बाधाएँ, देरी और निराशा लाता है, इसलिए इस योग में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है.

गणेश जयंती पर लग रहा है भद्रा का साया

गणेश जयंती के दिन भद्रा का साया भी रहने वाला है,  दोपहर में 02 बजकर 40 मिनट से लगेगी और 23 जनवरी को तड़के 02 बजकर 28 मिनट तक रहेगी. जिसकी वजह से शुभ काम नहीं हो पाएंगे, लेकिन पूजा में कोई बाधा नहीं होगी. क्योंकि पूजा मुहूर्त के बाद से भद्रा लग रही है. इस दिन मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 29 मिनट से लेकर 1 बजकर 37 मिनट तक है.

गणेश जयंती पर वर्जित होता है चंद्र दर्शन, जानें क्या है समय

गणेश जयंती या शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं किया जाता हैं. गणेश जयंती पर चंद्रमा 11 घंटे 57 मिनट तक उदित रहेगा. ऐसे में गणेश जयंती के दिन सुबह 9 बजकर 22 मिनट से रात 9 बजकर 19 मिनट तक चंद्र दर्शन वर्जित है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा का दर्शन करने से कलंक दोष लगता है.

विनायक चतुर्थी की सही पूजा विधि क्या है

विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी स्नान कर साफ कपड़े धारण करें. घर के मंदिर की सफाई करें, गंगाजल से शुद्ध करें उसके बाद साफ चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें और व्रत का संकल्प जरूर लें। भगवान गजानन को जल, अक्षत, चंदन, फूल, धूप, दीप और दूर्वा अर्पित करें. भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें. अंत में गणेश जी की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं. इसके बाद पूरे दिन उपवास रखें और शाम के समय भोग ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण करें.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

Chhaya Sharma

छाया शर्मा (Chhaya Sharma) को एंटरटेनमेंट न्यूज़, लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी में काम करते हुए 9 साल से ज्यादा हो चुके हैं। इनके द्वारा दी गई जानकारी व्यूअर्स को जागरूक करने और उन तक लेटेस्ट न्यूज़ पहुंचाने का काम करती है। ये अपनी ईमानदारी और स्पष्टता के साथ लोगों की सहायता करने में माहिर हैं। छाया से संपर्क करने के लिए chhaya.sharma@itvnetwork.com पर संपर्क किया जा

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